बनारस में मौत की चीखें

जिस तरह से यह बीम गिरने का हादसा हुआ है इसे पूरी तरह से सरकारी हत्याकांड कहा जाए तो गलत ना होगा. जब हजारों टन वजनी दो बीमों को चढ़ाया जा रहा था तो उस समय सुरक्षा के इंतजाम कहाँ थे ? सरकारी संवेदनहीनता का आलम यह रहा है कि घायलों से बीएचयू के हास्पिटल में जाँच के नाम पर पैसे मांगे गए. इस ब्रिज को लेकर सरकारी तंत्र कैसा सहयोगी रहा है वह आपको इसी से पता चल जाएगा कि ठेकेदार कौन है, यह नाम लेने में सबको दिक्कत हो रही है.

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