हृदय में व्यथा का रिसाव करती हैं सुरेश सेन निशांत की कविता

श्याम अंकुरम सुरेश सेन निशांत नहीं रहे. स्तब्धकारी खबर ! मेरा उनसे परिचय राजवर्धन के संपादन में कविता संकलन ‘स्वर –एकादश ‘ से हुआ था. राजवर्धन से जब यह संग्रह मिला था उनकी कुछ ही कविताओं को पढ़ पाया था जो दिल में गहरे से धंस गई.  उनकी कविता मुझ सहित लोगों के हृदय में व्यथा का रिसाव प्रवाहित कर गई . चाहे वह कविता ‘ गूजरात’ हो या’ पिता की छड़ी ‘ हो . यही मेरा उनसे प्रथम परिचय था . दुर्भाग्य है कि मैं कभी उनसे मिल नहीं…

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पहाड़ और नदियों ने खो दिया अपने कवि को

आज जब पहाड़, जंगल और जमीन सहित पूरी मानवता खतरे में है और उन्हें बचाने के लिए संघर्ष जारी है, ऐसे में एक कवि का अचानक चले जाना एक घहरा आघात है. पहाड़ और नदियों ने अपने कवि सुरेश सेन निशांत को खो दिया. बस रह है उनकी कविताएं. किन्तु यह सर्वमान्य है कि कवि मर कर भी नहीं मरता, वह सदा मौजूद रहता है हमारे बीच अपनी रचनायों के साथ.

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