“ कब याद में तेरा साथ नहीं/ कब हाथ में तेरा हाथ नहीं ”

घाटशिला (झारखण्ड) में प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘जश्ने फ़ैज़ ‘ की रिपोर्ट घाटशिला में 17 फरवरी को प्रलेस की ओर से होने वाले ‘जश्ने फ़ैज़’ आयोजन की सूचना मिली, तो सोचा कि हर हाल में इस आयोजन में शामिल होना है। घाटशिला में साहित्यिक-सांस्कृतिक सक्रियता के पीछे कथाकार शेखर मल्लिक की अहम भूमिका रहती है। इस आयोजन की सूचना भी पहले उन्हीं के एसएमएस से मिली। इधर रविवार होने के बावजूूद मेरी दूूसरी व्यस्तताएं भी थीं, लेकिन जो ज़िम्मेवारी थी उसे निबटा कर प्राचार्या से इज़ाजत लेकर मैं…

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गोरख के गीतों के साथ देश-दुनिया और समाज को बेहतर बनाया जा सकता है: अरुण कमल

क्रांतिकारी जनकवि गोरख पांडेय की स्मृति में हिरावल ने किया आयोजन गोरख के हिंदी-भोजपुरी के जनगीतों और गजलों का गायन हुआ पटना: 28 जनवरी. ‘ गोरख के गीतों के साथ हम देश-दुनिया और समाज को बेहतर बना सकते हैं। वे कबीर और नागार्जुन की परंपरा के एक बड़े कवि हैं। उन्होंने लोकगीतों का संस्कार लेकर भोजपुरी और ख्रड़ी बोली में गीत लिखे। उनकी कविताएं मजदूर-किसानों, उत्पीड़ित-वंचित और शोषित-अपमानित जनता के हक में लिखी गई हैं। वे आंदोलनों के पोस्टरों पर नजर आती हैं, वे नारों का रूप ले चुकी हैं।…

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