‘ राष्ट्रीय खलनायक ’ राजिंदर सच्चर

  राजघाट पर वह सन दो हज़ार बारह के मार्च की एक सुबह थी. सोरी सोनी के पुलिसिया उत्पीड़न का विरोध करने के लिए वहाँ कुछ लोग गांधीवादी कर्मकर्ता हिमांशु कुमार के साथ भूख हड़ताल पर बैठे थे. इनमें से एक लगभग नब्बे बरस के जस्टिस राजिंदर सच्चर भी थे. वे दो नौजवानों के कंधों का सहारा लेकर धीरे धीरे चलते हुए वहाँ आए थे. देख कर कुछ क्षण को ऐसा लगा जैसे ख़ुद महात्मा गांधी अपनी समाधि से उठकर चले आ रहे हों. सत्य की रक्षा के लिए सब…

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