जब वो ख़ाली बोतल फेंक के कहता है दुनिया तेरा हुस्न यही बद-सूरती है

मंटो ने समाज की गंदगी और घिलोनेपन को अनुभाव किया और ज़िन्दगी के जहर को इस प्रकार चखा की ये जहर उनके अंदर तक उतर गया। उनकी कहानियों में ज़िन्दगी का ये जहर प्रमुखता से देखने को मिलता है। वो अपने लेखन के ज़रिये लगातार ऐसी सच्चाइयों को सामने लाते रहे जिसका साहस कोई और नहीं कर पाया।

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ज़माना नाक़ाबिले-बर्दाश्त है…

मंटो की लगभग प्रत्येक कहानी दारूण यथार्थ से आंख मिलाने का साहस रखती है। ऐसी गूँज पैदा करती है कि वह मानवता के पक्ष में जाए। यथार्थ की दारूणता का पीछा करते हुए मंटो कहीं भी मौका नहीं देते कि दारूणता को छिपा लिया जाय। लेकिन यह भी सच है कि यथार्थ का रूप सामने रखकर वह उसके सामने समर्पण नहीं कर देते। यह संदेश देते हैं कि दारूणता का प्रतिकार भी हो सकता है।

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मंटो को याद करने का मतलब

अभी तक भारतीय साहित्य का व्यवस्थित और विश्वसनीय इतिहास नहीं लिखा गया है। जब कभी इसका इतिहास लिखा जाएगा उर्दू अफसानानिगार सआदत हसन मंटो का साहित्य बिल्कुल हाशिए के लोगों, जिन पर आम रूप से लोग खुसुर-फुसुर भी नहीं करना चाहते उनकी जिंदगी में घुसकर उनकी तल्ख और तुर्श सचाइयों से रू-ब-रू कराने में सबसे आगे प्रमाणित होंगे।

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