पत्रकारों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र के लिए लड़ना होगा: पंकज बिष्ट

प्रगतिशील-जनवादी साहित्यिक-सांस्कृतिक संगठनों ने ‘ मीडिया की संस्कृति और वर्तमान परिदृश्य ’ पर संगोष्ठी आयोजित की  कठुआ गैंगरेप के खिलाफ लिखी गई कविताओं की पुस्तिका का लोकार्पण भी हुआ पटना. ‘‘ पत्रकारिता की संस्कृति का सवाल लोकतंत्र की संस्कृति से जुड़ा हुआ है। समाज को बेहतर बनाने के बजाय बर्बरता की ओर ले जाने और लोगों को विवेकहीन बनाने की जो कोशिश की जा रही है, उसके प्रति पत्रकारिता की क्या भूमिका है, यह गंभीरता से सोचना होगा। पत्रकारों को यह तय करना ही होगा कि जो खबर वे छाप…

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गंगा-जमुनी तहजीब और आज़ादी के पक्ष में है संजय कुमार कुंदन की शायरी : प्रो. इम्तयाज़ अहमद

  शायर संजय कुमार कुंदन के संग्रह ‘भले, तुम नाराज हो जाओ’ पर बातचीत   पटना. ‘‘हटा के रोटियां बातें परोस देता है/ इस सफ़ाई से के कुछ भी पता नहीं चलता है। उसने कुएं में भंग डाली है तशद्दुद की/ नशे को कौमपरस्ती का नाम धरता है।’’ ‘‘तुम ही गवाह, क़ातिल तुम ही, तुम ही मुंसिफ़/ तुम ही कहो ये कहां की भला शराफ़त है। ’’ ‘‘तू ज़ुर्म करे और हो क़ानून पे काबिज/ बच-बच के चलें और ख़तावार बनें हम।”   11 फरवरी को बीआईए सभागार में शायर…

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