विष्णु खरे: बिगाड़ के डर से ईमान का सौदा नहीं किया

विष्णु जी नहीं रहे। हिंदी साहित्य संसार ने एक ऐसा बौद्धिक खो दिया, जिसने ‘बिगाड़ के डर से ईमान’ की बात कहने से कभी भी परहेज़ नहीं किया। झूठ के घटाटोप से घिरी हमारी दुनिया में ऐसे लोग बहुत कम रह गए हैं। निर्मम आलोचना की यह धार बगैर गहरी पक्षधरता और ईमानदारी के सम्भव नहीं हो सकती थी। बनाव और मुँहदेखी उनकी ज़िंदगी से ख़ारिज थे। चुनौतियों का सामना वे हमेशा सामने से करते थे। अडिग-अविचल प्रतिबद्धता, धर्मनिरपेक्ष-प्रगतिशील-जनवादी दृष्टि और विभिन्न मोर्चों पर संघर्ष करने का अप्रतिम साहस हमारे…

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मोहन भारद्वाज ने मैथिली साहित्य में आधुनिक-प्रगतिवादी दृष्टिबोध स्थापित किया: जसम

जन संस्कृति मंच ने मैथिली के वरिष्ठ आलोचक मोहन भारद्वाज के निधन पर शोक संवेदना जाहिर करते हुए कहा है कि उनका निधन भारतीय साहित्य की प्रगतिशील साहित्यिक धारा के लिए एक अपूरणीय क्षति है. नागार्जुन और राजकमल चौधरी के बाद की पीढ़ी के जिन प्रमुख साहित्यकारों ने मैथिली साहित्य में आधुनिक-प्रगतिवादी मूल्यों और नजरिये के संघर्ष को जारी रखने की चुनौती कुबूल की थी, मोहन भारद्वाज उनमें से थे.

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धुमाकोट बस दुर्घटना के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं : राजा बहुगुणा

भाकपा माले की केंद्रीय कमेटी के सदस्य राजा बहुगुणा ने पौड़ी गढ़वाल मंडल के धुमाकोट में हुई बस दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों प्रति संवेदना प्रकट करते हुए मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। राजा बहुगुणा ने पहाड़ में लगातार हो रही वाहन दुर्घटनाओं के लिए सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि, “आमतौर पर पहाड़ में चल रहे सार्वजनिक वाहन निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते जिसके चलते दुर्घटनाएं आम हो गई हैं। सरकार की दुर्घटना के समय दिखाई जाने वाली तात्कालिक मुस्तैदी बगैर मानकों…

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न्याय के लिए आजीवन लड़ने वाले शख्स के रूप में पहचाने जाएंगे सच्चर साहेब : एनएपीएम

जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम) की जस्टिस राजेन्द्र सच्चर को श्रद्धांजलि   नई दिल्ली.  आज न्यायाधीश राजेंद्र सच्चर जी पंचतत्व में विलीन हुए. सच्चर साहेब  न्याय के लिए आजीवन लड़ने वाले शख्स के रूप में पहचाने जाएंगे. वे पीयूसीएल जैसे मानव अधिकार संगठनों के साथ तो थे ही , वे देश के मुस्लिमों पर बनी सच्चर कमेटी के अध्यक्ष भी रहे. देश के जन आंदोलनों में शायद ही कोई ऐसा जनपक्षीय और पर्यावरणपक्षीय आंदोलन होगा जिसके हक में सच्चर साहेब खड़े ना हुए होंगे . 90 वर्ष से ऊपर की उम्र…

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कर्मकर्ता और कवि रजनी तिलक ने पूरी ज़िंदगी मेहनतकशों की शोषण मुक्ति और सम्मान के नाम कर दिया- जसम

गंगाधर पान तावड़े का जाना प्रतिरोध के एक महत्वपूर्ण स्तंभ का जाना है- जसम सामाजिक कार्यकर्ता और प्रख्यात साहित्यकार रजनी तिलक का 30 मार्च 2018 को रात 11 बजे दिल्ली के सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल में देहांत हो गया। पिछले दिनों एक यात्रा में स्लिप डिस्क हो जाने से जटिलता बढ़ गयी। अंततः उनका आधा से अधिक शारीर पैरालाइज हो गया। उन्हें सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। ऑपरेशन के बाद भी हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ। अंततः उनको बचाया न जा सका। आप का जन्म 27 मई…

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