अभिव्यक्ति के प्रति ईमानदार एक रचनाकार की त्रासदी ‘मंटो’

अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ‘मंटो’ बायोपिक फिल्म की बहुत समय से प्रतीक्षा कर रहा था। समय-समय पर आने वाले ट्रेलर या वीडियो के टुकड़े इंतिजार को अ-धीरज में बदल रहे थे। आज वह दिन हाथ लग ही गया। कुछ रचनाकार होते हैं जिनके लेखन के साथ-साथ उनके जीवन का भी आकर्षण किसी को खींच सकता है। यह व्यक्तिगत रुचि का मसला हो सकता है। मेरे लिए तुलसी, कबीर, ग़ालिब, निराला, मंटो जैसे रचनाकार लेखन के साथ-साथ अपने जीवन का भी आकर्षण रखते हैं। उनके लेखन से गुजरने की तरह उनके जीवन…

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ज़मीर को हर शै से ऊपर रखने वाले मंटो

अखिलेश प्रताप सिंह. खुदा ज्यादा महान हो सकता है लेकिन मंटो ज्यादा सच्चे दिखते हैं और उससे भी ज्यादा मनुष्य, क्योंकि मंटो को सब कुछ इस कदर महसूस होता है कि शराब भी उनकी ज़ेहन की आवाज को दबा नहीं पाती है. यह फ़िल्म अगर नंदिता दास ने लिखी है और निर्देशित की है और चूँकि यह फ़िल्म मंटो जैसे हिपटुल्ला? व्यक्ति का जीवन चरित है, तो इसे देखना मनोरंजन की चहारदीवारी से आगे की चीज है. दुनिया की सभी सुंदर सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की तरह यह फिल्म दर्शक को अपने…

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