मामूली दृश्यों से जीवन का विचलित करने वाला वृत्तान्त तैयार करतीं शुभा की कविताएँ

मंगलेश डबराल   शुभा शायद हिंदी की पहली कवि हैं, जो अभी तक कोई भी संग्रह न छपवाने के बावजूद काफ़ी पहले विलक्षण  कवि के रूप में प्रतिष्ठित हो गयी थीं. कई लोग उन्हें सबसे प्रमुख और अलग तरह की समकालीन कवयित्री मानते हैं, और इंतज़ार करते हैं कि कभी उनका संग्रह हाथ में ले सकेंगे. स्वाभाविक रूप से शुभा नारीवादी हैं, लेकिन यह नारीवाद बहुत अलग तरह का, वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध और वामपंथी है. लेकिन उसके अंतःकरण की तामीर एक ऐसे ‘अतिमानवीय दुःख’ से हुई है, जिसे न…

Read More

वीरेनियत-3: अंत:करण के आयतन को विस्तारित करती कविताओं की शाम

वीरेन डंगवाल स्मृति में आयोजित जसम का सालाना कार्यक्रम  बीते 28 सितंबर को आयोजित यह वीरेनियत नाम से तीसरा जलसा था। जन संस्कृति मंच की ओर से इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित इस आयोजन में गुलमोहर हॉल खचाखच भरा था। नए से लेकर पुराने कवि और कविता प्रेमी दोस्तों की यह महफ़िल युवा और वरिष्ठ कवियों को सुनने के लिए जमी हुई थी। लगभग ढाई घंटे चले इस कार्यक्रम में हिंदी कविता का विराट पैनोरमा दिखा, जो मौजूदा सांस्कृतिक हालात और सत्ता संरचना की गहरी आलोचना साझा करने वाला था।…

Read More