वीरेनियत-3: अंत:करण के आयतन को विस्तारित करती कविताओं की शाम

वीरेन डंगवाल स्मृति में आयोजित जसम का सालाना कार्यक्रम  बीते 28 सितंबर को आयोजित यह वीरेनियत नाम से तीसरा जलसा था। जन संस्कृति मंच की ओर से इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित इस आयोजन में गुलमोहर हॉल खचाखच भरा था। नए से लेकर पुराने कवि और कविता प्रेमी दोस्तों की यह महफ़िल युवा और वरिष्ठ कवियों को सुनने के लिए जमी हुई थी। लगभग ढाई घंटे चले इस कार्यक्रम में हिंदी कविता का विराट पैनोरमा दिखा, जो मौजूदा सांस्कृतिक हालात और सत्ता संरचना की गहरी आलोचना साझा करने वाला था।…

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‘कुछ भी नहीं किया गया’: वीरेन डंगवाल की एक कविता का पाठ

नवारुण प्रकाशन ने अभी हाल में ‘कविता वीरेन’ (वीरेन डंगवाल की सम्पूर्ण कविताएँ) को प्रकाशित कर जारी किया है । वीरेन को याद करते हुए और इस अमूल्य किताब की सुंदर प्रस्तुति से प्रेरित होकर इसमें शामिल पहली ही कविता का एक संवेदनशील और बेहतरीन पाठ कवि-आलोचक पंकज चतुर्वेदी ने किया है । प्रस्तुत है: बड़ा कवि वह है, जो अपने बड़े होने को बार-बार सत्यापित करता है। अच्छा कवि उसे कह सकते हैं, जिसकी रचना की सिर्फ़ कुछ पंक्तियों में नहीं, बल्कि समूची संरचना में कविता विन्यस्त हो। बड़ा…

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वीरेन डंगवाल की याद और सृजन, कल्पना, रंगों, शब्दों और चित्रों की दुनिया

डॉ. कामिनी त्रिपाठी शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय बैकुंठपुर में आयोजित त्रिदिवसीय ‘वीरेन डंगवाल जन्म दिन समारोह’ का समापन 8 अगस्त को छात्राओं द्वारा वीरेन दा की कविताओं का पोस्टर बनाते हुए सम्पन्न हुआ | कार्यक्रम के पहले दिन लगभग 30 छात्राओं ने ‘नवारुण’ द्वारा प्रकाशित वीरेन दा की संपूर्ण कविताओं के संग्रह ‘कविता वीरेन’ से अपनी पसंद की कविताओं का चयन कर अपने अंदाज़ में उनका पाठ किया | छात्राओं द्वारा चयनित कविताओं को देखने से एक बात बहुत आसानी से समझी जा सकती है कि वीरेन दा की कविताएं…

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कवि वीरेन डंगवाल के 71वें जन्मदिन पर बरस रही थी कवि की याद

(पांच अगस्त को हिंदी के कवि वीरेन डंगवाल का जन्म दिन होता है । देश भर में कवि की याद में हुए आयोजनों में से कुछ झलकियाँ यहां प्रस्तुत हैं ।) बरस रही थी कवि की याद  कल पांच अगस्त को कवि वीरेन डंगवाल का जन्मदिन था .कवि तो बहुत हैं और उनकी यादें भी ,परन्तु मैंने लोगों को जिस तरह वीरेन डंगवाल को याद करते हुए सुना है ,देखा है वैसा किसी को नहीं .जो उनसे एक बार भी मिला है ,जो उनसे लोगों को मिलते हुए देखा भर…

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वत्सल उम्मीद की ठुमक के साथ मैं तो सतत रहूँगा तुम्हारे भीतर नमी बनकर: वीरेन डंगवाल

करीब 16 बरस पहले वीरेन डंगवाल के संग्रह ‘दुश्चक्र में स्रष्टा’ पर लिखते हुए मैंने उल्लास, प्रेम और सौंदर्य को उनकी कविता के केंद्रीय तत्वों के रूप में रेखांकित किया था- यह कहते हुए कि मूलतः अनाधुनिक मान लिए गए ये तत्व दरअसल वीरेन की काव्य-दृष्टि में एक वैकल्पिक आधुनिकता की खोज करते लगते हैं। अब उनके निधन के बाद जब उनका समग्र ‘कविता वीरेन’ के नाम से मेरे सामने पड़ा है तो यह देखना मेरे लिए प्रीतिकर है कि वीरेन की कविता ने उन दिनों जो प्रभाव मुझ पर…

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वीरेन दा की याद: ‘नदी’ कविता के बहाने से

शिव प्रकाश त्रिपाठी “ लंबे और सुरीले नहीं थे मेरे गान मेरी सांसे छोटी थी पर जब भी गाए मैंने बसंत के ही गान गाए अपनी फटी हुई छाती के बावजूद” बसंत आ चुका है पर न तो हवा में रवानगी ही आई और न फूलों में भौरें. फूल खिले तो हैं पर उनमें कालिख की एक पूरी परत चढ़ी हुई है. ये अंधकार युग की पदचाप भी हो सकती है. एक ऐसा समय गति में है, जहाँ एक तरफ पूरे विश्व में वैश्वीकरण बनाम संरक्षणवाद पर छाती-पीट बहस चल…

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एक यारबाश कवि की याद

रमाशंकर सिंह   (आज वीरेन दा उर्फ डॉ. डैंग का जन्म दिन है। उनसे बड़ा यारबाश और दोस्ती को मूल्य की तरह बरतने वाला कोई दूसरा मित्र-कवि पता नहीं अब नसीब होगा या नहीं। उनकी हरकतें, प्यार, डाँट, शरारते सब जेहन में रह-रह कर कौंध जाती हैं। उनका जीवन और उनकी कविता जैसे कि एक दूसरे की पूरक हैं। एक ‘दोस्त-कवि’ को याद करते हुए कुछ वर्ष पहले ‘ रहूंगा भीतर नमी की तरह ‘ पुस्तक में एक लेख मित्र और युवा अध्येता रमाशंकर सिंह ने लिखा था जिसे वीरेन…

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