विष्णु प्रभाकर : उनके पैरों में गति और कंठ में संगीत था

एक बार किसी ने पूछा था–‘ विष्णु जी, तुम्हें दो वरदान मांगने का अवसर मिले तो क्या मांगोगे ? ’ तुरन्त उत्तर दिया उन्होंने–‘ पैरों में गति और कंठ में संगीत।’ विष्णु जी का पूरा व्यक्तित्व ही संगीतमय था और यह भी सही है कि उनके पैरों में पंखों जैसी गति थी। उनके दो ही व्यसन थे–घूमना और लिखना।

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