विश्वविद्यालयों में काँचा इलैया की किताबों से कौन डरता है ?

लक्ष्मण यादव विश्वविद्यालय एक लोकतान्त्रिक मुल्क में अपने समय-समाज के अंतर्विरोधों से संवाद करते हुए तार्किक-वैज्ञानिक विवेक सम्पन्न बोध से लैस नागरिक तैयार करते हैं। जिन मुल्कों में सामाजिक-सांस्कृतिक विषमता जितनी ज्यादा होगी, उन मुल्कों में ज्ञान के ऐसे प्रतिष्ठानों की ज़िम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। आज़ाद भारत जैसे अंतर्विरोधों के मुल्क में विश्वविद्यालयों को ये बड़ी ज़िम्मेदारी निभानी थी, लेकिन वे उतने खरे न उतरे। तमाम विरोधी विचारों, मान्यताओं व सांस्कृतिक बोध को विश्वविद्यालयों में सबसे पहले जगह देनी थी, उनमें भी वंचित-शोषित दलित-पिछड़े-आदिवासी-अल्पसंख्यक-महिला तबके के लिए यह…

Read More

महात्‍मा गाँधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय के कुलपति धमकी देते हैं -कौओं की तरह टांग दिये जाओगे

पटना/ नई दिल्ली. महात्‍मा गाँधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, मोतिहारी, बिहारके शिक्षक संघ ने कुलाध्‍यक्ष (राष्‍ट्रपति) को पत्र भेजकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अरविन्द कुमार अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगते हुए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है. इस पत्र में शिक्षक संघ ने कुलपति पर  परिवीक्षा अवधि में शिक्षकों को बर्खास्‍त करने की धमकी देने, आरक्षण के नियमों का खुला उल्‍लंघन करने, कारण बताओ नोटिसों के द्वारा विश्‍वविद्यालय में आतंकी माहौल बनाने, यौन उत्‍पीड़न की झूठी शिकायतों द्वारा शिक्षकों का मानसिक उत्‍पीड़न करने, शिक्षकों के खिलाफ विद्यार्थियों का इस्‍तेमाल करने, अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी…

Read More

विश्वविद्यालयों में बढती प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ लखनऊ में धरना

शैक्षिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों में बढती प्रशासनिक तानाशाही व शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ अभिभावक मंच ने 13 जुलाई को परिवर्तन चौक के पास आचार्य नरेन्द्र देव की समाधि स्थल पर धरना व प्रतिरोध सभा का आयोजन किया.

Read More

‘ स्वायत्तता’ का आगमन अर्थात अकादमिक संस्थानों को दुकान में तब्दील करने की तैयारी

(दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर  उमा राग का यह लेख  ‘  द वायर ’ में  29 मार्च को प्रकाशित हुआ  है )   हम से छीन लिया गया कॉपी कलम किताब कैद कर लिया गया हमारे सपने को फिर हम से कहा गया तुम स्वायत्त हो हमारे अधिकारों को छीनने के लिए उन्होंने एक नया शब्द गढ़ा है ‘स्वायत्तता’ जैसे उन्होंने कभी अंगूठा काटने को कहा था ‘ गुरु दक्षिणा ‘ –प्रदीप कुमार सिंह कितनी सच है यह पंक्ति कि हमारे अधिकारों को छीनने के लिए ही अक्सर सत्ता नए-नए…

Read More