निराला की कविता मनुष्य की मुक्ति की कविता है

(महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (21 फ़रवरी-15 अक्टूबर) की पुण्यतिथि पर अपने लेख के माध्यम से उन्हें याद कर रहें हैं विवेक निराला)  निराला को अपने समय में ‘महाप्राण ’ कहा गया था और यह एकदम सही भी था क्योंकि उस पूरे दौर में एक कवि अपने समय के कई अल्पप्राण प्रतिमानों को चुनौती दे कर अपना महाप्राणत्व सिद्ध कर रहा था। अपने युग में कई तरह की आलोचनाओं और प्रत्यालोचनाओं को झेलते हुए इस कवि ने पहली बार ’मनुष्य की मुक्ति की तरह कविता की मुक्ति’ की अवधारणा प्रस्तुत की…

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अपने समय की आहट को कविता में व्यक्त करता कवि विवेक निराला

युवा कवि विवेक निराला की इन कविताओं को पढ़ कर लगता है मानो कविता उनके लिए एक संस्कार की तरह है-एकदम नैसर्गिक और स्वस्फूर्त! इन कविताओं में एक निर्झर-सा प्रवाह है-एक-एक शब्द, संवेदनों और शिल्प में कल-कल की ध्वनि-सा! उनकी कविता एक यत्नहीन कविता-सी है, सायास या प्रविधि जैसा कुछ भी नहीं। इस युवा कवि में अपने समय की आहट सुनने का गजब का माद्दा है। अपने समय की तमाम विसंगतियों और विद्रूपताओं को वे बहुत हौले-से, बगैर किसी काव्य-उत्तेजना के अपनी कविता में उतारते हैं। बगैर किसी आहट के…

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