बथानी टोला जनसंहार : न्याय का इंतजार कब तक ?

22 साल पहले 11 जुलाई, 1996 को दो बजे दिन में रणवीर सेना के कोई 50-60 हथियारबन्द लोगों ने बथानी टोला को घेर कर हमला किया और दलितों, अपसंख्यको , मजदूर – किसानों, शोषितों के घर मे आग लगा कर 21 लोगों को मार डाला. महिलाओं और बच्चों को खास निशाना बनाया गया. मृतकों में 16 महिलाएं और 7 बच्चे- बच्चियाँ थीं. 3 वर्ष से लेकर 70 वर्ष तक की महिला को भी नही छोड़ा गया. हमलवार पूरे तीन घंटों तक मौत का खेल खेलते रहे. इस टोला के सौ…

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भुलाए नहीं भूलेगा यह दिन

कमरे में चौकी पर बैठे थे नागार्जुन. पीठ के पीछे खुली खिड़की से जाड़े की गुनगुनी धूप आ रही थी. बाहर गौरैया चहचहा रही थी. तभी पहुंचे कॉ. विनोद मिश्र, कवि से मिलने कवि के पास. समय ठिठका-सा रहा, शब्द चूक-से गए. नागार्जुन ने वीएम के चेहरे को कांपती उंगलियों से टटोला. देर तक नाक, कान, ठुड्डी को छूते रहे। उनकी भाव विह्वल आंखें चमक से भर गईं.

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