‘ इप्टा के लोगो का सरकारी इस्तेमाल जन सांस्कृतिक परंपरा और उसकी क्रांतिकारी छवि के साथ शरारतपूर्ण छेड़छाड़ है ’

इप्टा के प्रतीक चिह्न का अनधिकृत इस्तेमाल जान-बूझ कर इप्टा की जन सांस्कृतिक परंपरा और उसकी क्रांतिकारी छवि के साथ शरारतपूर्ण छेड़छाड़ है. बिहार सरकार तुरंत इस विज्ञापन को वापस ले. उन सारे अख़बारों में, जिनमें यह विज्ञापन छपा है, उनमें इस कृत्य के लिए उसी प्रमुखता के साथ खेद प्रकट करे। यदि सरकार ने समय रहते लिखित रूप से खेद प्रकट नहीं किया तो संस्कृतिकर्मी अदालत का दरवाजा खटखटायेंगे.

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कुम्भ मेले का लोगो : कला की सरकारी समझ का नायाब नमूना

अख़बार में छपे फोटो से पहले तो मुझे यह लगा कि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री प्रयाग में 2019 में होने वाले कुम्भ मेले का पोस्टर जारी कर रहे हैं , पर खबर पढने  से पता चला कि यह पोस्टर नहीं बल्कि कुम्भ मेला- 2019 का आधिकारिक लोगो है । लोगो या प्रतीक चिन्ह मूलतः एक पहचान चिन्ह ही होता है जिसका सांकेतिक और कलात्मक होने के साथ-साथ व्यावहारिक होना जरूरी है जिससे उसकी प्रतिलिपि बनाना सहज ( रिप्रोड्यूसिबल) हो और किसी कार्यक्रम के प्रचार के लिए उसका व्यापक…

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