लोक गीतों में चौरी चौरा विद्रोह -‘ माई रहबू ना गुलाम, न बहइबू अंसुआ ’

  ( ये लोकगीत कथाकार सुभाष कुश्वाहा की पुस्तक  ‘ चौरी चौरा विद्रोह और स्वाधीनता आंदोलन  ’ से लिए गए हैं )   दोहा गोरखपुर में सुना, चौरी चौरा ग्राम बिगडी पब्लिक एक दम, रोक न सके लगाम   वीर छंद आल्हा भडके लोग गांव के सारे, दई थाने में आग लगाय। काट गिराया थानेदार को , गई खबर हिंद में छाय। लगाया कुछ लाेगों ने, अगिन कहीं भडक न जाय खबर सुनी जब गांधी जी ने, दहशत गई बदन में छाय। फैली अशांति कुछ भारत में आंदोलन को दिया…

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