‘ प्रेमकथा एहि भांति बिचारहु ’

  (संत वैलेन्टाइन की तरह प्रेम के पक्षधर मगर कई मामलों में उनसे भिन्न संत रविदास थे। उनकी  रचना जगत में प्रेम एक विराट भाव है. रैदास की प्रेम परिकल्पना व्यापक धरातल पर प्रतिष्ठित है . प्रेम दिवस पर संत रविदास के प्रेम के वैशिष्ट्य को व्याख्यायित करता बजरंग बिहारी तिवारी का यह निबन्ध पढ़िए)   प्रेम की सामर्थ्य देखनी हो तो संतों का स्मरण करना चाहिए| संतों में विशेषकर रविदास का. प्रेम की ऐसी बहुआयामी संकल्पना समय से बहुत आगे है. उनके समकालीनों में वैसा कोई नहीं दिखता. आधुनिक आलोचक…

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