रामनरेश राम : किसानों की मुक्ति के प्रति प्रतिबद्ध एक क्रांतिकारी कम्युनिस्ट

( बिहार के आरा में अखिल भारतीय किसान सभा की ओर से 26 अक्टूबर को ‘ भाजपा भगाओ किसान बचाओ रैली’ होने वाली है। यह रैली भोजपुर के क्रांतिकारी किसान आंदोलन के शिल्पकारों में से एक कामरेड रामनरेश राम की आठवीं बरसी के मौके पर हो रही है. ) किसान-मजदूरों, दलित-वंचित-उत्पीड़ित समुदायों और लोकतंत्रपसंद लोगों के पसंदीदा नेता, 60 के दशक के लोकप्रिय मुखिया और 1995 से लगातार तीन बार विधायक रहने वाले अत्यंत ईमानदार और जनप्रिय विधायक का. रामनरेश राम का पूरा जीवन एक प्रतिबद्ध क्रांतिकारी कम्युनिस्ट का जीवन था।…

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‘समय है सम्भावना का’ : सत्ता के मौन की पहचान है

जगदीश पंकज जी का कविता संग्रह ‘समय है सम्भावना का’ इसी वर्ष आया है. जगदीश पंकज जी नवगीतकार हैं. दलित साहित्य में नवगीत की कोई समृद्ध परंपरा नहीं दिखती है. लेकिन जगदीश पंकज जी ने दलित साहित्य में इस नयी विधा को जोड़कर बहुत बड़ा योगदान दिया है. इससे दलित साहित्य का परिदृश्य व्यापक हुआ है. दलित साहित्य ने अपने आरंभ में स्वानुभूति की अभिव्यक्ति पर बल दिया और इसी को दलित साहित्य का मुख्य प्रस्थान विन्दु बनाया इसलिए साहित्य के अनगढ़पन को स्वकृति भी मिली. लालित्य और गेयता को…

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