एक यारबाश कवि की याद

रमाशंकर सिंह   (आज वीरेन दा उर्फ डॉ. डैंग का जन्म दिन है। उनसे बड़ा यारबाश और दोस्ती को मूल्य की तरह बरतने वाला कोई दूसरा मित्र-कवि पता नहीं अब नसीब होगा या नहीं। उनकी हरकतें, प्यार, डाँट, शरारते सब जेहन में रह-रह कर कौंध जाती हैं। उनका जीवन और उनकी कविता जैसे कि एक दूसरे की पूरक हैं। एक ‘दोस्त-कवि’ को याद करते हुए कुछ वर्ष पहले ‘ रहूंगा भीतर नमी की तरह ‘ पुस्तक में एक लेख मित्र और युवा अध्येता रमाशंकर सिंह ने लिखा था जिसे वीरेन…

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केदार बाबू की कविताएँ बुंदेलखंड की सांस्कृतिक गजेटियर हैं

रमाशंकर सिंह आज केदारनाथ अग्रवाल का जन्मदिन है. आज ही के दिन 1911 में उनका जन्म हुआ था. युग की गंगा, लोक और आलोक, फूल नहीं रंग बोलते हैं, आग का आईना, गुलमेंहदी,पंख और पतवार, हे मेरी तुम, अपूर्वा, बोले बोल अबोल, जो शिलाएं तोड़ते हैं, आत्म गंध, अनहारी हरियाली जैसे सुंदर कविता संग्रह उनके नाम है. तेजी से उजाड़ होते जा रहे बुंदेलखंड, मेहनतकश बुंदेलखंड को प्रवासी मजदूरों के हिन्टरलैंड में बदल जाने की कहानी को अगर शुरू से जानना हो तो केदारनाथ अग्रवाल को जरुर पढ़ा जाना चाहिए.…

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