‘ भविष्य का भारत ’ की संघी दृष्टि

संघ भविष्य के भारत को हिन्दू राष्ट्र मानेगा। इसे सभी नहीं मान सकते। राजनीतिक दलों को वोट की चिन्ता है। इसलिए वे खुलकर हिन्दू राष्ट्र के विरोध में खड़े नहीं होंगे, पर बौद्धिक वर्ग जो क्रीतदास नहीं है, वह हिन्दू राष्ट्र का सदैव विरोध करेगा। भविष्य का भारत केवल हिन्दुओं का भारत नहीं हो सकता। नहीं होना चाहिए। हिन्दुत्व और भारतीय तत्व दोनों एक नहीं है। कभी हो भी नहीं सकते हैं।

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दक्षिणपंथ की कीलें

भगवा खेमे के लिये अपने मंसूबो को पूरा करने के लिए 2019 का चुनाव निर्णायक है और इसके लिये वे कुछ भी करेंगे. यह चुनाव इतना भव्य और नाटकीय होगा जिसकी अभी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं.

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