अकबर अलाहाबादी बनाम मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम

  मेंहदी हुसैन तन्ज़, मज़ाह और ज़राफत की शायरी का मैदान कोई आसान मैदान नहीं है। इस मैदान में सिर्फ एक साहबे नज़र, साहबे मुशाहेदा, पुर हौरला और अपने अन्दर एहतेजाज की लतीफ सलाहियत रखने वाले शायर ही कामियाब होते हैं। अकबर अलाहाबादी तन्ज़ व मज़ाह के कामियाब शोअरा में से कामियाब तरीन शायर हैं। अगर अकबर अलाहाबादी की शायरी का मुतालिया किया जाए तो ये बात साबित होने में देर नहीं लगेगी कि अकबर अलाहाबादी ने अपने आपको तन्ज़ व मज़ाह के बीचो-बीच मैदान में काएम करके चौतरफा एहतेजाजी…

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