‘पूछूंगी अम्मी से/या फिर अल्ला से/कैसे होता है बचके रहना….!’

आसिफा पर केन्द्रित दो कविता संग्रह का लोकार्पण लखनऊ. निर्भया हो या आसिफा, कठुआ हो या उन्नाव, मुजफ्फरपुर हो या देवरिया – ये स्त्रियों पर होने वाली हिंसा, यौन उत्पीड़न और बर्बरता के प्रतीक हैं। इन घटनाओं ने समाज को उद्विग्न किया है, उद्वेलित किया है। प्रतिरोध के स्वर फूटे हैं। रचनाकारों ने इसे अपने सृजन का विषय बनाया है। कवियों ने कविताएं लिखी हैं। ऐसी ही कविताओं का संग्रह है ‘आसिफाओं के नाम’ और ‘मुझे कविता पर भरोसा है’ जिसका लोकार्पण यहां लखनऊ के राष्ट्रीय पुस्तक मेले के मंच…

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