समाज का सच सामने लाती है हेमंत कुमार की कहानी ‘रज्जब अली’

(कथाकार हेमंत कुमार की कहानी  ‘ रज्जब अली  ’ पत्रिका ‘ पल-प्रतिपल ’ में प्रकाशित हुई है. इस कहानी की विषयवस्तु, शिल्प और भाषा को लेकर काफी चर्चा हो रही है. कहानी पर चर्चा के उद्देश्य से समकालीन जनमत ने 22 जुलाई को इसे प्रकाशित किया था. कहानी पर पहली टिप्पणी युवा आलोचक डॉ. रामायन राम की आई  जिसे हमने प्रकाशित किया है,  दूसरी टिप्पणी जगन्नाथ दुबे की आई जो डॉ. रामायन राम द्वारा उठाए गए सवालों से भी टकराती है . इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए प्रस्तुत है…

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“ तुम्हारी तहजीब अपने खंजर से आप ख़ुदकुशी करेगी ”

ए.बी.पी. न्यूज़ में जिस तरह से मिलिंद खांडेकर और पुण्य प्रसून वाजपेयी की विदाई हुई और अभिसार शर्मा को खामोश किया गया,वह निश्चित ही सत्ता के दबाव का नतीजा है. ‘ मास्टरस्ट्रोक ’ का ‘ स्ट्रोक ’, ‘मास्टर’ को इस कदर चुभ गया कि ‘ मास्टर ’ ने स्ट्रोक लगाने वालों को निपटा दिया. सत्ता का संदेश साफ है या तो हमारी बोली बोलो, वरना झेलो. इस मसले पर दो तरह की प्रतिक्रियाएँ हैं. एक जिसमें पुण्य प्रसून वाजपेयी समेत कतिपय टी.वी. पत्रकारों को मसीहा के रूप में पेश किया…

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मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड :बिहारी समाज पहले दिन से आंदोलित है

कुमार परवेज मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड को मीडिया में अब जगह मिल रही है क्योंकि इसे अब दबाया नहीं जा सकता. दबाने के बहुत प्रयास हुए थे, लेकिन बिहारी समाज ने ऐसा होने नहीं दिया. घटना की जानकारी के पहले दिन से ही वह लड़ रहा है, पता नहीं रवीश कुमार ने ने अपने लेख में ऐसा क्यों लिखा कि सांस्थानिक यौन उत्पीड़न की ऐसी वीभत्स घटना पर बिहारी समाज सोता रहा. नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. मुजफ्फरपुर के अखबारों में 2 जून को यह घटना सामने आई. उसके…

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सेक्युलर इंडिया से इतनी दिक़्क़त क्यों है ?

डर या लालच के मारे किसी राजनैतिक दल का पिछलग्गू हो जाना या सरकारी भोंपा बन जाना तो समझ आता है, लेकिन क्या अब भारतीय मीडिया के इस धड़े का संपादकीय नागपुर में लिखा जा रहा है.

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भारत के लोकतंत्र को भारत के मीडिया से ख़तरा है : रवीश कुमार

  ( वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार द्वारा शनिवार को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में इंडिया कॉन्‍फ्रेंस 2018 में दिया गया भाषण )   आप सभी का शुक्रिया. इतनी दूर से बुलाया वो भी सुनने के लिए जब कोई किसी की नहीं सुन रहा है. इंटरव्यू की विश्वसनीयता इतनी गिर चुकी है कि अब सिर्फ स्पीच और स्टैंडअप कॉमेडी का ही सहारा रह गया है. सवालों के जवाब नहीं हैं बल्कि नेता जी के आशीर्वचन रह गए हैं. भारत में दो तरह की सरकारें हैं. एक गवर्नमेंट ऑफ इंडिया. दूसरी गर्वनमेंट ऑफ मीडिया.…

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