माँ तुझे सलाम !

(माँ केवल ममता का ही खज़ाना नहीं है बल्कि समझदारी का भी स्रोत होती है.  समाज के बारे में, नैतिकता, यौनिकता, सही और गलत के विवेक के बारे में हमें एक नयी दृष्टि देने का भी निमित्त हो सकती है. आइये  ‘मदर्स डे’ के उपलक्ष्य में माँ की रूढ़ हो चुकी छवि से इतर कविता कृष्णन के इस लेख के माध्यम से माँ की एक नयी छवि से परिचित होते हैं, उस पर बात और बहस करते हैं) ‘टू किल अ मॉकिंगबर्ड’ उपन्यास 1950 के दशक के अमेरिका के दक्षिणी…

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