रिमझिम बरसे रे बदरिया….

भाकपा-माले की ओर से संचालित जन-अधिकार पदयात्राओं और गांधी मैदान में 1 मई, मजदूर दिवस को आयोजित महासम्मेलन ने साहित्य-संस्कृति की दुनिया को भी नई ऊर्जा, उत्साह और आवेग देने का काम किया. इस अभियान बड़ी संख्या में संस्कृतिकर्मियों ने भागीदारी की.

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