भिखारी ठाकुर लिखित ‘ गबरघिचोर ‘ के मंचन के साथ नाट्योत्सव का समापन

भोजपुरी के नामी कवि-नाटककार भिखारी ठाकुर का यह नाटक अभी भी प्रासंगिक है. ‘गबरघिचोर’ सामाजिक संरचना में स्त्री की जगह, महिला-पुरुष सम्बंध और विभिन्न क़िस्म की सांस्कृतिक सत्ताओं से हमारा साक्षात कराता है

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बेगूसराय में भिखारी ठाकुर के लोक प्रसिद्ध नाटक ‘ गबरघिचोर ’ का मंचन

बेगूसराय (बिहार ). बेगूसराय के दिनकर कला भवन  में दो दिवसीय रंगताल नाट्योत्सव के अंतिम दिन 17 फरवरी को को भिखारी ठाकुर का लोक प्रसिद्ध नाटक ‘ गबरघिचोर ’ का मंचन रंग संस्था ‘ रंगताल ’ द्वारा किया गया। नाटक गबरघिचोर एक ऐसी स्त्री की कहानी है जिसका पति शादी करने के तुरंत बाद परदेश कमाने चला जाता है। 15 साल बाद जब वह लौट कर आता है तो उसे पता चलता है कि उसका 12 साल का बेटा है. वह बच्चे को अपने साथ परदेश ले जाने का प्रयास करता…

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