केदार बाबू की कविताएँ बुंदेलखंड की सांस्कृतिक गजेटियर हैं

रमाशंकर सिंह आज केदारनाथ अग्रवाल का जन्मदिन है. आज ही के दिन 1911 में उनका जन्म हुआ था. युग की गंगा, लोक और आलोक, फूल नहीं रंग बोलते हैं, आग का आईना, गुलमेंहदी,पंख और पतवार, हे मेरी तुम, अपूर्वा, बोले बोल अबोल, जो शिलाएं तोड़ते हैं, आत्म गंध, अनहारी हरियाली जैसे सुंदर कविता संग्रह उनके नाम है. तेजी से उजाड़ होते जा रहे बुंदेलखंड, मेहनतकश बुंदेलखंड को प्रवासी मजदूरों के हिन्टरलैंड में बदल जाने की कहानी को अगर शुरू से जानना हो तो केदारनाथ अग्रवाल को जरुर पढ़ा जाना चाहिए.…

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