बेहतर दुनिया का ख्वाब देखने और उसके लिए संघर्ष करने वाली राजनीति की लाल पताका उठा रहा है युवा

वामपंथी छात्र संगठन हाथ से बनाए गए कलात्मक पोस्टरों के सहारे चुनाव लड़ रहे थे. भाषण,जनगीत,नुक्कड़ नाटक ही उनकी ताकत थे और पूंजी के नाम पर उनके पास वर्ष भर के छात्र आंदोलनों की सक्रियता की पूंजी थी. उनको न केवल धनबल का मुक़ाबला करना था,बल्कि अपने खिलाफ चलाये जा रहे मिथ्या प्रचार का मुकबला भी करना था. ऐसे में यदि वामपंथी छात्र संगठनों ने इतने बड़े पैमाने पर छात्र-छात्राओं का वोट हासिल किया तो यह निश्चित ही उल्लेखनीय और उम्मीद जगाने वाला है. यह इस बात का भी द्योतक है कि आज के दौर का युवा सिर्फ आई.टी. सेल के घृणा अभियान का वाहक और मॉब लिंचिंग गिरोहों का हिस्सा नहीं बन रहा है,वह आदर्शों, उसूलों वाली बेहतर दुनिया, बेहतर समाज का ख्वाब देखने और उसके लिए संघर्ष करने वाली राजनीति की लाल पताका भी उठा रहा है.

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चार लाख पद ख़त्म और ‘ माननीयों ’ की वेतन वृद्धि

बजट से ठीक एक दिन पहले अखबारों में खबर छपी कि केंद्र सरकार लगभग 4 लाख ऐसे पद खत्म करने जा रही है,जो पांच सालों से खाली हैं.आज बजट आया तो पता चला कि राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति,सांसदों आदि के वेतन में अच्छी खासी बढ़ोतरी की गयी है.इन दोनों बातों का आपस में कोई सम्बन्ध भले ही न हो,लेकिन ये दोनों ही केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं की अभिव्यक्ति तो हैं ही. सोचिये कि यदि राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति या सांसदों का वेतन बढाने का प्रस्ताव बजट में नहीं शामिल होता तो क्या इनमें से किन्ही महानुभाव…

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ट्रेड यूनियनों ने बजट को मज़दूर व गरीब विरोधी बताया, प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री का पुतला फूंका

पटना,01 फरवरी. बिहार के केंद्रीय ट्रेड यूनियनों एटक, सीटू, इंटक, टीयूसीसी, एआईयूटीयूसी, यूटीयूसी,एएमयू आदि संगठनों ने मोदी सरकार द्वारा पेश आम बजट को मज़दूर व गरीब विरोधी एवं कारपोरेट के हितों वाला बताते हुए आज शाम बुद्धा स्मृति पार्क पटना से बजट के खिलाफ जुलूस निकाला और डाकबंगला चौक पर प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री का पुतला फूंका।         जुलूस में शामिल प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति को 5 लाख और आशा-रसोइया को 5 हज़ार भी वेतन क्यों नही मोदी जबाब दो,सांसदों मंत्रियों के वेतन बढ़ाने के लिये बजट पेश करने का नाटक बन्द करो, 40 करोड़…

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