प्रदीप कुमार सिंह की कविताएँ : विह्वल करने से ज़्यादा विचार-विकल करती हैं

नदी समुद्र में जाकर गिरती है, यह तो सब जानते हैं. लेकिन यह सच्चाई तो प्रदीप की कविता को पता है कि नदी अपना दुःख दूसरी नदियों को सुनाने जाती है. क्योंकि स्त्री का दुःख स्त्री ही समझ सकती है. नदी जानती है कि समुद्र में उसका अस्तित्व खो जायेगा. इसलिए अपने होने का अर्थ एक नदी को दूसरी नदी ही बता सकती है.
लोकतंत्र के नाम पर जिस तंत्र का त्रास हमारे जन-सामान्य को झेलना पड़ रहा है, प्रदीप की निगाह उस पर भी रहती है. करुणा और व्यंग्य के मेल से ऐसी कविताएँ विह्वल करने से ज्यादा विचार-विकल करती हैं

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अपनी कथाओं में बाहरी दर्शक नहीं, खुद भी सम्मिलित हैं अमरकांत : प्रो राजेन्द्र कुमार

कथाकार अमरकान्त की स्मृति में सेंट जोसेफ़ में कार्यक्रम इलाहाबाद,  17 फरवरी. आज सेंट जोसेफ़ स्कूल के होगेन हॉल में जसम, जलेस, प्रलेस, परिवेश और अभिव्यक्ति की ओर से कथाकार अमरकान्त की याद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर  ‘समकालीन चुनौती’ और ‘स्मृति में अमरकान्त’ पत्रिकाओं का अमरकान्त पर केंद्रित विशेषांक का विमोचन रविकिरण जैन, प्रो राजेन्द्र कुमार, सुधीर, अशोक सिद्धार्थ, अनीता गोपेश, रमेश ग्रोवर और शिवानंद ने किया. इस अवसर पर नीलम शंकर ने अमरकान्त की अप्रकाशित कहानी ‘साड़ियाँ’ और अरविंद बिंदु ने उनके अप्रकाशित…

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