वैज्ञानिक-चित्त की खोज में पूरे जीवन बेचैन रहने वाला एक शिक्षाविद्

यशपाल बराबर इस बात को रेखांकित करते थे कि देश में सभी अपने बच्चों को विज्ञान पढ़ाना चाहते तो हैं किंतु वैज्ञानिक दृष्टि नहीं देना चाहते. बच्चों के आगे समाज की पूरी संरचना विज्ञान के प्रतिकूल है. बगैर दृष्टि और समझ के विज्ञान शिक्षा का मूल्य उनके लिए नहीं था. विज्ञान शिक्षा का मतलब उनके लिये सभी तरह की संकीर्णताओं, कूपमंडूकताओं और क्षुद्रताओं को विज्ञान की कसौटी पर जांचना-परखना है.

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