चंद्रबली सिंह ने जनवाद को परिभाषित करने का काम किया

 ‘हमारा समय और चंद्रबली सिंह की आलोचना दृष्टि’ विषय पर लखनऊ में संगोष्ठी  प्रसिद्ध आलोचक चंद्रबली सिंह की पुण्य तिथि पर कैफ़ी आज़मी एकेडमी में ‘हमारा समय और चंद्रबली सिंह की आलोचना दृष्टि’ विषय पर चंद्रबली सिंह स्मृति न्यास, जलेस, जसम और प्रलेस की ओर से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सबसे पहले चंद्रबली सिंह के पुत्र प्रवाल कुमार सिंह ने आये हुए अतिथियों का स्वागत किया। उसके बाद विषय प्रवर्तन करते हुए कथाकार देवेन्द्र ने अपने विद्यार्थी जीवन की तमाम यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि आपातकाल के समय एक…

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पत्रकारों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र के लिए लड़ना होगा: पंकज बिष्ट

प्रगतिशील-जनवादी साहित्यिक-सांस्कृतिक संगठनों ने ‘ मीडिया की संस्कृति और वर्तमान परिदृश्य ’ पर संगोष्ठी आयोजित की  कठुआ गैंगरेप के खिलाफ लिखी गई कविताओं की पुस्तिका का लोकार्पण भी हुआ पटना. ‘‘ पत्रकारिता की संस्कृति का सवाल लोकतंत्र की संस्कृति से जुड़ा हुआ है। समाज को बेहतर बनाने के बजाय बर्बरता की ओर ले जाने और लोगों को विवेकहीन बनाने की जो कोशिश की जा रही है, उसके प्रति पत्रकारिता की क्या भूमिका है, यह गंभीरता से सोचना होगा। पत्रकारों को यह तय करना ही होगा कि जो खबर वे छाप…

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‘ हिंदुत्व का हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नहीं ’

नई दिल्ली में ‘ देशप्रेम के मायने : संदर्भ आंबेडकर और भगत सिंह ’ नई दिल्ली.  भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस की पूर्व संध्या और डॉ. अम्बेडकर के महाड़ सत्याग्रह को याद करते हुए चार प्रमुख लेखक-संगठनों- जलेस, दलेस, प्रलेस और जसम ने मिलकर ‘ देशप्रेम के मायने : संदर्भ आंबेडकर और भगत सिंह ’ का आयोजन 22 मार्च को गांधी शांति प्रतिष्ठान, दिल्ली में किया। अध्यक्ष मंडल की तरफ से बोलते हुए चंचल चौहान ने कहा कि भगत सिंह और आंबेडकर जैसे आंदोलनकर्ता जिन दिनों भारत की राजनीतिक तथा सामाजिक…

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‘गाय’ नाटक का मंचन रोके जाने का कलाकारों ने किया विरोध

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के इशारे पर शाहजहांपुर जिला प्रशासन द्वारा ‘गाय’ नाटक के मंचन पर रोक लगाने का इप्टा, जसम, प्रलेस, जलेस, साझी दुनिया, अर्थ, अमिट, कलम, राही मासूम रज़ा एकेडमी आदि प्रगतिशील व जनवादी सांस्कृतिक संगठनों तथा लेखकों व कलाकारों ने अपना तीखा विरोध प्रकट किया है। उनका कहना है कि यह न सिर्फ कला की स्वतंत्रता व  अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है बल्कि यह सत्ता की फासिस्ट कार्रवाई है। इसका एकजुट प्रतिवाद जरूरी है, न मात्र कलाकारों के द्वारा बल्कि लोकतांत्रिक संगठनों व व्यक्तियों…

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अपनी कथाओं में बाहरी दर्शक नहीं, खुद भी सम्मिलित हैं अमरकांत : प्रो राजेन्द्र कुमार

कथाकार अमरकान्त की स्मृति में सेंट जोसेफ़ में कार्यक्रम इलाहाबाद,  17 फरवरी. आज सेंट जोसेफ़ स्कूल के होगेन हॉल में जसम, जलेस, प्रलेस, परिवेश और अभिव्यक्ति की ओर से कथाकार अमरकान्त की याद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर  ‘समकालीन चुनौती’ और ‘स्मृति में अमरकान्त’ पत्रिकाओं का अमरकान्त पर केंद्रित विशेषांक का विमोचन रविकिरण जैन, प्रो राजेन्द्र कुमार, सुधीर, अशोक सिद्धार्थ, अनीता गोपेश, रमेश ग्रोवर और शिवानंद ने किया. इस अवसर पर नीलम शंकर ने अमरकान्त की अप्रकाशित कहानी ‘साड़ियाँ’ और अरविंद बिंदु ने उनके अप्रकाशित…

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