आधी रात कांपते हाथों, रुंधे कंठ और बहते हुए आंसुओं के बीच लिखा गया एक पत्र

 प्रधानमंत्री के नाम शहीद चन्द्रशेखर की मां का पत्र संतोष सहर   17 अप्रैल 1997 की वह शाम कभी नहीं भूलती जब मैं ‘ समकालीन लोकयुद्ध ‘ के एक साथी को लेकर दरौली क्षेत्र के विधायक कॉ. अमरनाथ यादव के विधायक आवास पहुंचा था। मां कौशल्या वहीं ठहरी हुई थीं। जब हम पहुंचे, उनको एक चौकी पर बैठा पाया। उन्होंने मुझे अपनी ही बगल में बिठाया। उनके सामने कुछ खाने को रखा हुआ था। लेकिन, वो लगातार रोये जा रही थीं और बोले जा रही थीं। डेढ़- दो घण्टे गुजर…

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