………तो क्या कामरेड जफ़र हुसैन की हत्या किसी ने नहीं की ?

कामरेड जफ़र हुसैन की हत्या को आज एक साल हो गया. पिछले वर्ष 16 जून को उनकी हत्या कमिश्नर अशोक जैन के नेतृत्व में नगरपालिका प्रतापगढ़ के कर्मचारियों ने की थी लेकिन इनके खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

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लाल किला की नीलामी के खिलाफ लेखकों, बुद्धिजीवियों , संस्कृतिकर्मियों ने प्रतिरोध मार्च निकाला

इस प्रतिरोध मार्च में आइसा, अमन बैरदारी, सेंटर फॉर दलित लिटरेचर एंड आर्ट, दलित लेखक संघ, डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट, डी.टी.आई, इप्टा, जन संस्कृति मंच, जनवादी लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक संघ, एस एफ आई, के वाई एस, एपवा, ऐक्टू, प्रतिरोध का सिनेमा समेत तमाम संगठन शामिल हुए.

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साक्षी मिताक्षरा की कविताएं : गाँव के माध्यम से देश की राजनीतिक समीक्षा

आर. चेतन क्रांति गाँव हिंदी कविता का सामान्यतः एक सुरम्य स्मृति लोक रहा है, एक स्थायी नोस्टेल्जिया, जहाँ उसने अक्सर शहर में रहते-खाते-पीते, पलते-बढ़ते लेकिन किसी एक बिंदु पर शहर के सामने निरस्त्र होते समय शरण ली है. वह गाँव जो छूट गया, वह गाँव जिसे छोड़ना पड़ा, वह गाँव जहाँ सब कुछ बचपन की तरह इतना सुंदर था, अक्सर कविता में आता रहा है. गद्य विधाओं में गाँव जिस तरह देश की राजनीतिक समीक्षा का आधार बना, वैसा कविता में संभवतः नहीं हुआ. इधर के नए कवियों में शहर…

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इस क्रूरता पर हम सिर्फ़ रोयेंगें नहीं: सविता सिंह

सविता सिंह  आज कल मेरी सैद्धांतिक समझ इस बात को समझने में खर्च हो रही है कि किसी देश में छोटी बच्चियों के साथ इतना घिनौना और दर्दनाक बलात्कार क्यों हो रहा है ? क्या इसे सिर्फ़ बर्बर कृत्य कहकर समझ के स्तर पर हम इससे हाथ झाड़ सकते हैं – नहीं ! यह बात तो स्पष्ट है कि हिंसा में उत्तरोत्तर बढ़ोत्तरी हमें भूमण्डलीकृत दौर में उभरे हिंदुत्व की मनोवैज्ञानिक समझ हासिल करने को प्रेरित करती है, क्योंकि इस हिंसा के केंद्र में सभ्यता विरोधी क्रूरता है. यह क्रूरता उन…

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