यह सब हमारे ही समयों में होना था

मोनीजा हाशमी इस सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर अपनी बात रखने वाली थीं. ऐसे समय में जब बलात्‍कारों की सुर्खियां भारत की छवि को दागदार किये है क्‍या यह मिशनरी उनके सवालों को झेलने से इतना डर गयी कि उन्‍हें न केवल सम्‍मेलन में भाग नहीं लेने दिया बल्कि उन्‍हें उस सम्‍मेलन में एक दर्शक के बतौर शामिल तक होने से रोक दिया. पथराती ताकतों का वजूद कैसा कांपता है, भाषाई कीमियागिरी के सामने, यह उसका एक नमूना है.

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