‘अपनी धुन में कबूतरी’ की पहली स्क्रीनिंग नैनीताल में

प्रीमियर शो दुपहर 3.30 जी जी आई सी, तल्लीताल, नैनीताल उत्तराखंड के पुराने लोगों के कानों में अब भी कबूतरी देवी के गाने गूंजते रहते। ‘पहाड़ो को ठंड पाणी…’ अब भी शीतलता प्रदान करता है। 1939 में उत्तराखंड के सुरम्य जनपद चंपावत के लेटी गाँव में जन्मी कबूतरी जी को यूं तो बचपन से ही संगीत के संस्कार मिले लेकिन शादी के बाद उनकी असल सांगीतिक यात्रा तब शुरू हुई जब उनके पति की भागदौड़ के कारण वे आखिरकार रेडियो की कलाकार बनीं। फिर तो सत्तर और अस्सी का दशक…

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