नेसार नाज़ की कहानी ‘मीरबाज़ खान’

(नेसार नाज़ कथा साहित्य में बहुत परिचित नाम नहीं है | छत्तीसगढ़ के एक निहायत ही छोटे से कस्बे बैकुंठपुर (जो अब जिला मुख्यालय बन गया है) में अपनी खूबसूरत मुस्कान के साथ लंबे डग भरते इन्हें आसानी से देखा जा सकता है | आज उनकी उम्र लगभग 62 साल है, पढ़ाई के नाम पर कक्षा सातवीं पास हैं पर हैं हिन्दी, उर्दू, छत्तीसगढ़ी के उस्ताद | नेसार नाज़ का कथाकार रूप कहीं बहुत अंधेरे में खो चुका था लेकिन भला हो कवि व आईएएस अधिकारी संजय अलंग का कि…

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प्रेमचंद किसान जीवन की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार धरम, महाजन और साहूकार की भूमिका की शिनाख्त करते हैं

31 जुलाई 2018 को प्रेमचंद जयंती के अवसर पर शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय , बैकुंठपुर(छत्तीसगढ़) में ‘प्रेमचंद और हमारा समय’ विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई | इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ. पीयूष कुमार ने कहा कि किसानों की जिस स्थिति को प्रेमचंद ने आज से बहुत साल पहले अपने कथा साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया था, वह आज भी बदली नहीं है बल्कि और ज्यादा भयावह हुई है | उदारीकरण ने लूट का जो तंत्र खड़ा किया है उसने अनंत जीवटता वाले किसानों…

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