समानता का नया यूटोपिया रचती है ‘ देह ही देश ‘ – अनामिका

हिन्दू कालेज में प्रोफ़ेसर गरिमा श्रीवास्तव की किताब ‘ देह ही देश ‘ पर परिसंवाद  डॉ रचना सिंह   दिल्ली। ”देह ही देश” केवल यूरोप की स्त्री का संसार नहीं है बल्कि दर्द और संघर्ष का यह आख्यान अपनी सार्वभौमिकता के कारण बहुपठनीय बन गया है। सुप्रसिद्ध कवि-कथाकार अनामिका हिन्दू कालेज में ‘देह ही देश’ पर आयोजित एक परिसंवाद में कहा कि युवा विद्यार्थियों के बीच इस किताब पर गंभीर चर्चा होना यह विश्वास जगाता है कि स्त्री पुरुष समानता का यूटोपिया अभी बचा हुआ है और गरिमा श्रीवास्तव जैसे लेखक…

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फासीवाद के खिलाफ संघर्ष में मार्क्स के विचार से बेहतर विचार नहीं- दीपंकर भट्टाचार्य

क्रोनी पूंजीवाद, सांप्रदायिक विभाजन और मनुवादी के बीच गठजोड़ है. लिचिंग स्थाई परिघटना बना दी गई है. लिचिंग करने वालों को पता है कि उन्हें सत्ता का संरक्षण मिला है. यह फासीवाद राज्य नही तो क्या है. ऐसे राज्य या तानाशाही के खिलाफ संघर्ष में मार्क्स के विचार से बेहतर विचार नहीं.

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प्रो तुलसीराम का चिन्तन अम्बेडकरवाद और मार्क्सवाद के बीच पुल – वीरेन्द्र यादव

प्रो तुलसी राम ने जहां मार्क्सवाद के रास्ते दलित आंदोलन का क्रिटिक रचा, वहीं उन्होंने वामपंथ के अन्दर मौजूद जातिवादी प्रवृतियों का भी विरोध किया. आज जिस तरह हिन्दुत्ववादी शक्तियां आक्रामक हैं, तुलसी राम के विचार मार्क्सवाद और अम्बेडकरवाद के बीच पुल का काम करते हैं.

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मोदी दोबारा सत्ता में नहीं आने वाले – राकेश सिंघा

कामरेड राकेश सिंघा का कहना था कि हिमांचल में वामपंथ आगे बढ़ सकता है तो देश के दूसरे हिस्से में भी यह संभव है। वित्तीय पूंजी ने जैसे अन्तरविरोध खड़े किए हैं, उसका इस्तेमाल करना हमें सीखना होगा। यह आराम से नहीं होगा। भारत का समाज जटिल समाज है तो समस्याएं भी जटिल हैं। प्रतिरोधी मास खड़ा करना जरूरी है।

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व्यवस्था की विसंगतियों पर प्रहार है देव नाथ द्विवेदी की गजलों में

लखनऊ में देव नाथ द्विवेदी के  गजल संग्रह ‘ हवा परिन्दों पर भारी है ’ का विमोचन और परिसंवाद कौशल किशोर लखनऊ. ‘ हिन्दुस्तानी जबान में आम आदमी की कविता को हम हिन्दी गजल कहते हैं. समकालीनता और जन पक्षधरता इसके दो घटक हैं. जन समस्या, जन सरोकार, जनाक्रोश और जनांदोलन से हिन्दी गजलो का गहरा जुड़ाव है. दुष्यन्त, गोरख, अदम से यह परम्परा आगे बढ़ी. देव नाथ द्विवेदी की गजलें इसी का हिस्सा है. देव नाथ की गजलों में सरलता और सहजता है तो वहीं गंभीरता और कहने का अपना…

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