नुलकातोंग फर्जी मुठभेड़ : माओवादियों के नाम पर निर्दोष मूलनिवासियों की हत्या

मूलनिवासियों के साथ हमारी वृहद बातचीत और गहरी जांच-पड़ताल में यह स्पष्ट हो जाता है कि यह मुठभेड़ नहीं बल्कि मूलनिवासियों को जल-जंगल-जमीन और उनके संस्कृति से बेदखल करने के लिए ऑपरेशन प्रहार-4 था. मौके पर कोई माओवादी नहीं था बल्कि सैकड़ों की संख्या में सुरक्षा बलों के जवानों को देखकर ग्रामीण भागने और छिपने की कोशिश कर रहे थे जिन पर बिना कुछ कहे और बताए गोलियां बरसा दी गईं. मरने वालों में दो-तीन नाबालिग थे. सुकमा एसपी का बयान गलत साबित हो रहा है. पत्रकारों और सिविल सोसायटी के लोगों को स्वतंत्र रूप से इन युद्ध क्षेत्रों में जाने से पहले थाने में जानकारी देने के लिए कहा जा रहा है और बिना किसी जिम्मेदार अधिकारियों के अनुमति के जाने से रोका जा रहा है. उनके कामों में विध्न पहुंचाया जा रहा है.

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