गंगा-जमुनी तहजीब और आज़ादी के पक्ष में है संजय कुमार कुंदन की शायरी : प्रो. इम्तयाज़ अहमद

  शायर संजय कुमार कुंदन के संग्रह ‘भले, तुम नाराज हो जाओ’ पर बातचीत   पटना. ‘‘हटा के रोटियां बातें परोस देता है/ इस सफ़ाई से के कुछ भी पता नहीं चलता है। उसने कुएं में भंग डाली है तशद्दुद की/ नशे को कौमपरस्ती का नाम धरता है।’’ ‘‘तुम ही गवाह, क़ातिल तुम ही, तुम ही मुंसिफ़/ तुम ही कहो ये कहां की भला शराफ़त है। ’’ ‘‘तू ज़ुर्म करे और हो क़ानून पे काबिज/ बच-बच के चलें और ख़तावार बनें हम।”   11 फरवरी को बीआईए सभागार में शायर…

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