सबरीमाला में महिलाओं का प्रवेश

यह सही है कि पितृसत्तात्मकता सभी संस्थागत धर्मों का अविभाज्य हिस्सा है। मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश का आंदोलन इस पितृसत्तात्मक व्यवस्था पर चोट कर रहा है और इसके अच्छे नतीजे भविष्य में सामने आ सकते हैं। यद्यपि कानून बनाने से किसी समस्या का पूर्ण समाधान नहीं होता परंतु यह अपने वैध अधिकारों को प्राप्त करने के लिए संघर्षरत समूहों की यात्रा में एक मील का पत्थर होता है।

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