‘ ललई यादव को भुला देना समाजवादी आंदोलन का भटकाव था ’

ललई यादव को भुला देना समाजवादी आंदोलन का भटकाव था. दूसरे शब्दों में ब्राह्मणवाद पूंजीवाद के समक्ष समर्पण था. जो वैचारिक संघर्ष ललई यादव व रामस्वरूप वर्मा ने चलाया था उसे सहेजने सँवारने और जन जन से जोड़ने को जरूरत है . ललई सिंह की रचनाओं खासकर उनके पांच नाटक- अंगुलिमाल, शम्बूक बध, एकलव्य, नागयज्ञ, संतमया बलिदान,हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं. वे उत्तर भारत में श्रमण संस्कृति और वैचारिकी के नव जागरण अग्रदूत थे.

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