चित्तप्रसाद का 1940 में बनाया गया ‘ जलियांवाला बाग ’ हत्याकांड पर एक दुर्लभ चित्र

इस चित्र को क्रूर औपनिवेशिक शासन के विरोध में एक मुक्तिकामी चित्रकार के साहसिक कला कर्म के रूप देखा जाना चाहिए. साथ ही यह सुदूर पंजाब की इस घटना पर पूर्वी बंगाल के चटगाँव के एक युवा चित्रकार के सही अर्थों में प्रादेशिकता की संकीर्णता से परे जाकर शोषितों के ‘चित्रकार’ की बनने की प्रक्रिया का एक अहम् चित्र भी है. अपनी कला यात्रा में , बाद के दौर में चित्तप्रसाद ने महाराष्ट् , तमिलनाडु , आंध्र प्रदेश , कश्मीर और बंगाल आदि प्रांतों की जनता और उनके सुख-दुःख को अपने…

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जलियांवाला बाग नरसंहार को याद रखना ज़रूरी है ताकि सनद रहे! : प्रो. चमनलाल

आज से 99 साल पहले इसी दिन पंजाब के अमृतसर शहर में एक ऐसी घटना हुई जो राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक लोकगाथा बन गई थी ।यह घटना थी, 13 अप्रैल 1919 को वैशाखी के हँसी-खुशी के त्योहार के अवसर पर ब्रिटिश शासकों द्वारा एक ऐसा हत्याकांड , जिसकी बर्बरता ने पूरे विश्व में उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद के असली चेहरे को दिखा दिया । जलियावाला बाग हत्याकांड इसके बाद एक उदाहरण बन गया और आज भी देश में जब किसी भी जगह से पुलिस के भयानक अत्याचारों के समाचार आते…

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