सातवाँ कुबेर दत्त स्मृति व्याख्यान में ‘सामाजिक सौहार्द की चुनौतियाँ ‘ पर बोलेंगे प्रो राजीव भार्गव

नई दिल्ली. सातवाँ कुबेर दत्त स्मृति व्याख्यान 17 नवम्बर को शाम 5 से नई दिल्ली के गाँधी शांति प्रतिष्ठान ( दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, आई टी ओ ) में आयोजित किया गया है. प्रति वर्ष जन संस्कृति मंच द्वारा आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में  इस बार का व्याख्यान सामाजिक सौहार्द की चुनौतियाँ विषय पर राजनीतिक दार्शनिक प्रो. राजीव भार्गव देंगे. इस अवसर पर आलेख प्रकाशन द्वारा प्रकाशित कुबेर दत्त के लेखों के संग्रह ‘जनवाद का तीसरा नेत्र – रामविलास शर्मा ’ का लोकार्पण भी होगा. यह जानकारी जन संस्कृति…

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कामरेड शाह चाँद की याद

जाने कितनी यादे हैं कामरेड शाह चाँद की। आईपीएफ और फिर इंकलाबी मुस्लिम कान्फ्रेंस में साथ काम करने की। कामरेड तकी रहीम से नोक-झोंक फिर हंसी-मज़ाक की। उस पहले दिन की भी जब भदासी कांड हुआ। जनसंस्कृति मंच का विद्यापति भवन में सम्मेलन चल रहा था और अल-सुबह भदासी में घट रही घटना की खबर आई। उसी दिन वहाँ के ग्राम-प्रधान के रूप में उनका नाम पहली बार सुना। ग्राम-प्रधान के रूप में उन्हें आदर्श ग्राम प्रधान का खिताब सरकार ने दिया था। लेकिन सरकार को नहीं मालूम था कि…

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दलित-बहुजन बौद्धिकता के विमर्श का दमन है प्रो. कांचा इलैया की पुस्तकों को पाठ्यक्रम से हटाना

नई दिल्ली. जन संस्कृति मंच ने दिल्ली विश्वविद्यालय की स्टैंडिंग कमिटी द्वारा प्रो. कांचा इलैया की पुस्तकों को एम.ए राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम से हटाए जाने की निंदा करते हुए इसे भारत में उभर रही दलित-बहुजन बौद्धिकता के विमर्श का दमन बताया है. जसम की ओर से रामनरेश राम द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि पिछले दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय कि स्टैंडिंग कमिटी ने अपनी मीटिंग में यह प्रस्ताव पास किया है कि कांचा इलैया की तीन किताबें ‘मैं हिन्दू क्यों नहीं हूँ ’, ‘ पोस्ट हिन्दू इंडिया’ ,…

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डीटीसी कर्मचारियों की हड़ताल को कई संगठनों का समर्थन मिला

नई दिल्ली.  डीटीसी कर्मचारियों की 29 अक्टूबर को होने वाली हड़ताल को हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों के साथ -साथ कई ट्रेड यूनियनों, शिक्षक संगठनों , विभिन्न महिला संगठनों, सांस्कृतिक कर्मियों तथा सिविल सोसाइटी प्रतिनिधियों का साथ मिला है. आज डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर (ऐक्टू) द्वारा आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इन संगठनों ने समर्थन की घोषणा की. दिल्ली परिवहन निगम में डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर(ऐक्टू) ने 29 अक्टूबर को एक दिवसीय हड़ताल का नोटिस दिया है जिसे अन्य यूनियनों – डीटीसी वर्कर्स यूनियन (एटक) और डीटीसी एम्प्लाइज कांग्रेस (इंटक) ने अपना समर्थन…

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हृदय में व्यथा का रिसाव करती हैं सुरेश सेन निशांत की कविता

श्याम अंकुरम सुरेश सेन निशांत नहीं रहे. स्तब्धकारी खबर ! मेरा उनसे परिचय राजवर्धन के संपादन में कविता संकलन ‘स्वर –एकादश ‘ से हुआ था. राजवर्धन से जब यह संग्रह मिला था उनकी कुछ ही कविताओं को पढ़ पाया था जो दिल में गहरे से धंस गई.  उनकी कविता मुझ सहित लोगों के हृदय में व्यथा का रिसाव प्रवाहित कर गई . चाहे वह कविता ‘ गूजरात’ हो या’ पिता की छड़ी ‘ हो . यही मेरा उनसे प्रथम परिचय था . दुर्भाग्य है कि मैं कभी उनसे मिल नहीं…

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प्रभा दीक्षित के नवगीतों में नारी मन के साथ आमजन भी – कमल किशोर श्रमिक

‘ गौरैया धूप की ’ का हुआ लोकार्पण  कानपुर। जन संस्कृति मंच, कानपुर के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ प्रभा दीक्षित के नवगीत संग्रह ‘गौरैया धूप की’ का लोकार्पण समारोह सिटी क्लब, कानपुर में  30 सितम्बर को आयोजित  हुआ जिसकी अध्यक्षता जनकवि कमल किशोर श्रमिक ने की। यह आयोजन शहीद भगत सिंह के 111 वें जन्मदिवस के अवसर पर था। अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्रमिक ने कहा कि प्रभा दीक्षित के काव्य में क्रमिक विकास हुआ है। उसी का उदाहरण उनका यह नवगीत संग्रह है। भारतीय नारी के अन्तर मन…

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विष्णु खरे: बिगाड़ के डर से ईमान का सौदा नहीं किया

विष्णु जी नहीं रहे। हिंदी साहित्य संसार ने एक ऐसा बौद्धिक खो दिया, जिसने ‘बिगाड़ के डर से ईमान’ की बात कहने से कभी भी परहेज़ नहीं किया। झूठ के घटाटोप से घिरी हमारी दुनिया में ऐसे लोग बहुत कम रह गए हैं। निर्मम आलोचना की यह धार बगैर गहरी पक्षधरता और ईमानदारी के सम्भव नहीं हो सकती थी। बनाव और मुँहदेखी उनकी ज़िंदगी से ख़ारिज थे। चुनौतियों का सामना वे हमेशा सामने से करते थे। अडिग-अविचल प्रतिबद्धता, धर्मनिरपेक्ष-प्रगतिशील-जनवादी दृष्टि और विभिन्न मोर्चों पर संघर्ष करने का अप्रतिम साहस हमारे…

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लेखकों, बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी के खिलाफ़ प्रतिरोध तेज करें-जसम

नई दिल्ली. जन संस्कृति मंच ने लेखकों, बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के घर छापेमारी और गिरफ्तारी को जनता के बीच भय और आतंक फ़ैलाने की कार्रवाई करार देते हुए मोदी सरकार के इस अघोषित आपातकाल के खिलाफ़ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन को और व्यापक व तेज करने का आह्वान किया है. जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय महासचिव मनोज कुमार सिंह ने जारी बयान में कहा कि 28 अगस्त को देश के कई राज्यों में कई लेखकों, बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के घर छापेमारी की गयी और कवि वरवर राव,…

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भारतीय चित्रकला में स्त्री को उपेक्षित रखा गया है- अशोक भौमिक

पटना: 13 अगस्त 2018. ‘‘भारतीय चित्रकला में ज्यादातर पुरुषों और पितृसत्तात्मक समाज को महिमामंडित करने का कार्य ही किया गया है। स्त्रियों को दोयम दर्जे का स्थान दिया गया है और उन्हें पुरुषों पर आश्रित दिखाया गया है।’’ ये बातें प्रख्यात चित्रकार अशोक भौमिक ने जन संस्कृति मंच द्वारा स्थानीय छज्जूबाग में आयोजित व्याख्यान ‘भारतीय चित्रकला में स्त्री’ में कही। यह कार्यक्रम बिहार और पूरे देश में स्त्रियों के साथ हो रही यौन-हिंसा की नृशंस घटनाओं के खिलाफ आयोजित था। अशोक भौमिक ने व्याख्यान-प्रदर्शन के दौरान यह बताया कि प्राचीन…

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कवि वीरेन डंगवाल के 71वें जन्मदिन पर बरस रही थी कवि की याद

(पांच अगस्त को हिंदी के कवि वीरेन डंगवाल का जन्म दिन होता है । देश भर में कवि की याद में हुए आयोजनों में से कुछ झलकियाँ यहां प्रस्तुत हैं ।) बरस रही थी कवि की याद  कल पांच अगस्त को कवि वीरेन डंगवाल का जन्मदिन था .कवि तो बहुत हैं और उनकी यादें भी ,परन्तु मैंने लोगों को जिस तरह वीरेन डंगवाल को याद करते हुए सुना है ,देखा है वैसा किसी को नहीं .जो उनसे एक बार भी मिला है ,जो उनसे लोगों को मिलते हुए देखा भर…

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वीरेन दा की याद: ‘नदी’ कविता के बहाने से

शिव प्रकाश त्रिपाठी “ लंबे और सुरीले नहीं थे मेरे गान मेरी सांसे छोटी थी पर जब भी गाए मैंने बसंत के ही गान गाए अपनी फटी हुई छाती के बावजूद” बसंत आ चुका है पर न तो हवा में रवानगी ही आई और न फूलों में भौरें. फूल खिले तो हैं पर उनमें कालिख की एक पूरी परत चढ़ी हुई है. ये अंधकार युग की पदचाप भी हो सकती है. एक ऐसा समय गति में है, जहाँ एक तरफ पूरे विश्व में वैश्वीकरण बनाम संरक्षणवाद पर छाती-पीट बहस चल…

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सत्ता संपोषित मौजूदा फासीवादी उन्माद प्रेमचंद की विरासत के लिए सबसे बड़ा खतरा:डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन

लोकतंत्र, संविधान और साझी संस्कृति के नेस्तनाबूद करने की हो रही है गहरी साजिश-कल्याण भारती प्रेमचंद के सपनों के भारत से ही बचेगी हमारी साझी संस्कृति-डॉ. राम बाबू आर्य 31 जुलाई, दरभंगा । आज स्थानीय लोहिया चरण सिंह कॉलेज के सभागार में “मौजूदा फासीवाद उन्माद और प्रेमचंद की विरासत” विषय पर संगोष्ठी आयोजित कर जन संस्कृति मंच, दरभंगा द्वारा महान कथाकार प्रेमचंद की 138वीं जयंती मनाई गई । इस अवसर पर बोलते हुए जसम राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह ‘समकालीन चुनौती’ के संपादक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन ने कहा कि “हमारे…

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राजेन्द्र कुमार : जैसा मैंने उन्हें देखा

उनका अलंकरण मुश्किल है. उनके बारे में अतिशयोक्ति संभव नहीं. ध्यान से देखें तो उन्होंने अपने जीवन और अपनी रचना में कुछ भी अतिरिक्त, कुछ भी surplus बचाकर रखा नहीं है. जो कुछ भी अर्जित रहा, वह इतने इतने रूपों में बंटता रहा कि कोई चाह कर भी उसका लेखा-जोखा नहीं तैयार कर सकता. सामाजिक सक्रियताओं, लेखकीय प्रतिबद्धताओं, अध्यापकीय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के दरम्यान उनका सारा अर्जन मानों खुशबू की तरह बिखर गया है.

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स्वामी अग्निवेश पर हमले के विरोध में लखनऊ, रांची, गोरखपुर में विरोध प्रदर्शन

जन आंदोलनों के सम्मानित नेता स्वामी अग्निवेश पर झारखण्ड में हुए प्राणघातक हमले का जगह-जगह प्रतिरोध हो रहा है. विभिन्न संगठनों ने लखनऊ, रांची और गोरखपुर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया.

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जसम ने प्रो रूपरेखा वर्मा के साथ एकजुटता की अपील की

लखनऊ, 7 जुलाई. जन संस्कृति मंच ने अवाम के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व उपकुलपति प्रो रूपरेखा वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज  करने का आदेश की कड़ी निंदा की है और लोकतांत्रिक संगठनों, नागरिक समाज, अभिभावकों, बौद्धिकों व नागरिकों से इस घटना का विरोध करने और प्रो रूपरेखा वर्मा के साथ एकजुटता की अपील की है. जन संस्कृति मंच, उत्तर प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष कौशल किशोर जारी बयान में कहा है कि लखनऊ विवि की पूर्व उपकुलपति प्रो रूपरेखा वर्मा को प्रदेश सरकार द्वारा…

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प्रो तुलसीराम का चिन्तन अम्बेडकरवाद और मार्क्सवाद के बीच पुल – वीरेन्द्र यादव

प्रो तुलसी राम ने जहां मार्क्सवाद के रास्ते दलित आंदोलन का क्रिटिक रचा, वहीं उन्होंने वामपंथ के अन्दर मौजूद जातिवादी प्रवृतियों का भी विरोध किया. आज जिस तरह हिन्दुत्ववादी शक्तियां आक्रामक हैं, तुलसी राम के विचार मार्क्सवाद और अम्बेडकरवाद के बीच पुल का काम करते हैं.

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महेश्वर स्मृति आयोजन में युवा कवि अदनान कफ़ील दरवेश और विहाग वैभव का काव्य पाठ

महेश्वर चाहते थे कि कवि-लेखकों और जनता के बीच कम से कम दूरी हो: आलोक धन्वा महेश्वर की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत है: संतोष सहर पटना, 24 जून . ‘‘महेश्वर चाहते थे कि कवि-लेखकों और जनता के बीच कम से कम दूरी हो, क्योंकि जनता ही रचना का अनंत स्रोत होती है। वह जनता जो मेहनत करती है, ईमान की रोटी खाती है। खून और कत्लोगारत में डूबो देने की नृशंसता से संघर्ष करते हुए वही जीवन को बचाती है।’’ आज बीआईए सभागार में दो दिवसीय महेश्वर स्मृति…

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कवि व पत्रकार सुभाष राय को अपमानित किये जाने के खिलाफ लेखक व पत्रकार 12 को विरोध प्रदर्शन करेंगे

लखनऊ, 11 जून। हमारा यह समाज कैसा बन रहा है जहां आम आदमी शान्ति से रहना चाहे तो भी उसे रहने नहीे दिया जायेगा। गुण्डों, लम्पटों, बाहुबलियों, दबंगों, धनपशुओं, समाज में रसूख रखने वालों की सत्ता व खाकी वर्दीधारियों के साथ ऐसी साठगांठ है कि इनकी राह में जो कोई आये, उसे वे ठोकर मार कर गिरा देने में ही अपनी शान समझते हैं। ऐसी ही एक घटना कवि, पत्रकार और ‘जनसंदेश टाइम्स’ के प्रधान संपादक सुभाष राय के साथ घटी। उन्हें और उनकी पत्नी शशि राय के साथ अभद्रता…

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मार्क्स का चिंतन सिर्फ आर्थिक नहीं सम्पूर्ण मनुष्यता का चिंतन है: रामजी राय

मार्क्स ने मुनष्य को एक समुच्चय में नहीं एक सम्पूर्ण इकाई के रूप में समझा और कहा कि वह एक ही समय में आर्थिक, राजनीतिक, दार्शनिक, सांस्कृतिक होता है. उसे टुकड़ो-टुकड़ों में अलग-अलग नहीं देख सकते. मार्क्स का चिंतन सिर्फ आर्थिक चिंतन नहीं सम्पूर्ण मनुष्यता का चिंतन है.

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‘ चन्द्रेश्वर की कविताएं सरल पर लिखना उतना ही कठिन ’

चन्द्रेश्वर प्रेम और प्रतिरोध के कवि हैं. ऐसी कविताओं की जरूरत थी. ये अपनी रचना प्रक्रिया और कन्टेन्ट में समकालीन कविताएं हैं. यहां व्यंग्य चित्र हैं, बहुत कुछ कार्टून की तरह. ये कविताएं जितनी सरल हैं, इन्हें लिखना उतना ही कठिन है. यहां सरलता जीवन मूल्य है.

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