“ कब याद में तेरा साथ नहीं/ कब हाथ में तेरा हाथ नहीं ”

घाटशिला (झारखण्ड) में प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘जश्ने फ़ैज़ ‘ की रिपोर्ट घाटशिला में 17 फरवरी को प्रलेस की ओर से होने वाले ‘जश्ने फ़ैज़’ आयोजन की सूचना मिली, तो सोचा कि हर हाल में इस आयोजन में शामिल होना है। घाटशिला में साहित्यिक-सांस्कृतिक सक्रियता के पीछे कथाकार शेखर मल्लिक की अहम भूमिका रहती है। इस आयोजन की सूचना भी पहले उन्हीं के एसएमएस से मिली। इधर रविवार होने के बावजूूद मेरी दूूसरी व्यस्तताएं भी थीं, लेकिन जो ज़िम्मेवारी थी उसे निबटा कर प्राचार्या से इज़ाजत लेकर मैं…

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