असली नक्सलियों के बीच

भाकपा माले खुद को आज भी बदल रही है . इसी महीने 5 सितम्बर को गौरी लंकेश की बरखी पर पार्टी महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और मैंने एक सम्मेलन को सम्बोधित किया था . बाद में उसी रोज फासिज्म के खिलाफ सड़क पर एक नुक्क्ड़ सभा को भी सम्बोधित किया था . मैंने यही महसूस किया , दीपांकर लकीर के फ़क़ीर बनना नहीं चाहते . उनकी पार्टी एक नए वैचारिक आयाम में प्रवेश करना चाहती है . या उसके लिए पंख फड़फड़ा रही है . माले ने मार्क्सवाद को फुले ,आंबेडकर के विचारों और भगत सिंह के सपनों से मंडित करने की पहल की है . 1990 के दशक में ही इस पार्टी ने ब्राह्मणवाद विरोध को अपनी कार्य सूची में शामिल किया था . आज वह इस पर जोर दे रहे हैं .

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भाकपा माले 27 सितंबर को गांधी मैदान में भाजपा भगाओ-लोकतंत्र बचाओ रैली करेगी

भाकपा माले ने 27 सितंबर को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में भाजपा भगाओ – लोकतंत्र बचाओ रैली करने का निर्णय किया है. जहानाबाद में संपन्न दो दिवसीय राज्य कमिटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया.

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गीत गाते, नारे लगाते, हाथ में लाल झंडा लिए खेत मजदूरों, किसानों, महिलाओं, युवाओं का कारवां बढ़ चला पटना की ओर

साम्प्रदायिक दंगों, दलित उत्पीडन तथा जनता के अधिकारों पर बढ़ते हमले के खिलाफ भाकपा माले की 23 अप्रैल से बिहार के विभिन्न हिस्सों में शुरू हुई ‘ भाजपा भगाओ-बिहार बचाओ, लोकतंत्र बचाओ-देश बचाओ जन अधिकार पदयात्रा ‘ 30 अप्रैल की शाम तक पटना पहुंच जाएगी. विभिन्न स्थानों पर रात्रि विश्राम के बाद एक मई को एक बार फिर से पैदल मार्च करते हुए यह यात्रा गांधी मैदान पहुंचेगी जहां जनअधिकार महासम्मेलन का आयोजन किया गया है. इस महासम्मेलन को मुख्य वक्ता पार्टी के महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य संबोधित करेंगे.

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