‘ आज की कविताएं आत्मचेतस व्यक्ति की प्रतिक्रिया है ’

अनिमेष फाउंडेशन लखनऊ की ओर से फ्लाइंग ऑफिसर अनिमेष श्रीवास्तव की स्मृति में ‘आज की कविता के स्वर’ एवम कविता पाठ का आयोजन किया गया. अनुराग पुस्तकालय लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हरी चरण प्रकाश ने की. उन्होंने अपने वक्तव्य में कविता के समय संदर्भों को व्याख्यायित किया और कहा की कविता गतिमान रहती है जो समय के साथ बदलती रहती है.युवा कवि एवं आलोचक अनिल त्रिपाठी ने ‘आज की कविता के स्वर’ पर अपने विचार रखते हुए मुक्तिबोध का हवाला देते हुए कहा कि आज की कविता आत्मचेतस व्यक्ति की प्रतिक्रिया है.

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कौशल किशोर का कविता संग्रह ‘ नयी शुरुआत ‘ : ‘ स्वप्न अभी अधूरा है ‘ को पूरा करने के संकल्प के साथ

    शैलेन्द्र शांत  “नयी शुरुआत’ साठ पार कवि कौशल किशोर की कविता की दूसरी किताब है  । सांस्कृतिक , सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में निरंतर सक्रिय रहे कौशल किशोर के इस संग्रह में 1969 से 1976 तक की कवितायें शामिल हैं. यानी कांग्रेसी शासन से मोहभंग की शुरुआत के बाद नक्सलबाड़ी किसान आंदोलन से लेकर आपातकाल तक की. कवि अपने वक्तव्य में खुद कहते हैं कि -‘बहुत कच्चापन मिलेगा इनमें ‘.  साथ ही यह भी कि – ‘पर यह कवि के बनने का दौर है ‘ .  आगे यह…

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स्वामी अग्निवेश पर हमले के विरोध में लखनऊ, रांची, गोरखपुर में विरोध प्रदर्शन

जन आंदोलनों के सम्मानित नेता स्वामी अग्निवेश पर झारखण्ड में हुए प्राणघातक हमले का जगह-जगह प्रतिरोध हो रहा है. विभिन्न संगठनों ने लखनऊ, रांची और गोरखपुर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया.

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नफरत के खिलाफ अदब का प्रोटेस्ट है ‘मै मुहाजिर नहीं हूं ’ – शारिब रुदौलवी

कथाकार-उपन्यासकार बादशाह हुसैन रिजवी के उपन्यास ‘मै मुहाजिर नहीं हूं’ के उर्दू संस्करण का 9 जून को यूपी प्रेस क्लब में विमोचन हुआ. इस उपन्यास का हिन्दी संस्करण 2011 में आ चुका है. इसका उर्दू अनुवाद डाॅ वजाहत हुसैन रिजवी ने किया है.

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इप्टा के 75 साल , पूरे साल चलेंगे आयोजन

भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) लखनऊ ने इप्टा के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में स्थापना दिवस जनगीतों एवं नाटक ‘हवालात’ की प्रस्तुति के साथ मनाया।

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सत्ता का प्रतिपक्ष रचती हैं कौशल किशोर की कविताएं

  ‘वह औरत नहीं महानद थी’ तथा ‘प्रतिरोध की संस्कृति’ का हुआ विमोचन लखनऊ. ‘हंसो, इसलिए कि रो नहीं सकते इस देश में/हंसो, खिलखिलाकर/अपनी पूरी शक्ति के साथ/ इसलिए कि तुम्हारे उदास होने से/उदास हो जाते हैं प्रधानमंत्री जी/हंसो, इसलिए कि/तुम्हें इस मुल्क में रहना है’।  ये पंक्तियां हैं कवि कौशल किशोर की ‘तानाशाह’ सीरीज कविता की जिसका पाठ 5 मई को उन्होंने यूपी प्रेस क्लब में किया। अवसर था जन संस्कृति मंच की ओर से आयोजित उनके कविता संग्रह ‘वह औरत नहीं महानद थी’ तथा गद्य कृति ‘प्रतिरोध की संस्कृति’…

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लूट और झूठ की व्यवस्था है पूंजीवाद : कौशल किशोर

निर्माण मजदूर यूनियन (असंगठित क्षेत्र) लखनऊ का 20 वां जिला सम्मेलन सम्पन्न लखनऊ, 23 फरवरी। पूंजीवाद लूट और झूठ की व्यवस्था है . इस निज़ाम  को बदले बगैर मजदूर वर्ग की लूट और उसकी जलालत की जिन्दगी को बदला नहीं जा सकता है। इसलिए मजदूरों को इस पूंजीवादी निजाम को बदलने के ऐतिहासिक कार्यभार को पूरा करने के लिए संगठित होना होगा।  संगठन और वैज्ञानिक विचारधारा ही उसके अस्त्र है. अपने इन हथियारों को उन्हें मजबूत करना है. यह बात 23 फरवरी को गोमती नगर के हिन्दी मीडिया सेन्टर में आयोजित…

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जनपक्षधरता से लैस हैं कौशल किशोर की कविताएं

  लखनऊ में वरिष्ठ कवि एवं संस्कृतिकर्मी कौशल किशोर का एकल काव्य पाठ और परिचर्चा का आयोजन संदीप कुमार सिंह नागरिक परिषद्, लखनऊ द्वारा इंडियन काफ़ी हाउस,जहाँगीराबाद मेंशन, हजरतगंज, लखनऊ में वरिष्ठ कवि और संस्कृतिकर्मी कौशल किशोर का एकल काव्य पाठ और परिचर्चा का आयोजन किया गया. कवि कौशल ने अपने नवीनतम संग्रह ” वह औरत नहीं महानद थी” से एक दर्जन बेहतरीन कविताओं का पाठ किया । कविताओं को पढ़ते हुए उन्होंने उनके संदर्भ भी बताए. जनपक्षधरता और जन आंदोलन से उपजी उनकी कविताएँ बिल्कुल सरल और सहज किस्म…

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‘ यह तश्ना की है गज़ल, इस शायरी में गाने-बजाने को कुछ नही ’

तश्ना आलमी की याद में लखनऊ में सजी गज़लों की शाम लखनऊ । तश्ना आलमी की शायरी गहरे तक छूती है। ऐसा लगता है कि एक शायर वंचितों की पीड़ा देख रहा है और उन तक पहुंचा रहा है। हम उस सबसे बड़े लोकतंत्र में हैं जहां आज भी न जाने कितने गरीब एक वक्त का फांका करके सोते हैं। यहां आज भी महिलाएं सर पर मैला उठाने को विवश हैं। ऐसे माहौल में चुप रहना भी जालिम की मदद करने जैसा है। अगर हम तश्ना को सच्ची श्रद्धांजलि देना…

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