मोदी सरकार द्वारा किसानों के साथ धोखाधड़ी के खिलाफ किसानों का “ दिल्ली मार्च ” 29-30 नवम्बर को

अखिल भारतीय किसान महासभा नई दिल्ली. 2014 के लोकसभा चुनाव में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा ने देश के किसानों से कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुरूप फसलों का डेढ़ गुना दाम देने का वायदा किया था. यही नहीं उन्होंने देश के लोगों को अच्छे दिन लाने का वायदा भी किया था. पर अपने साढे चार साल के शासन में इस सरकार ने न सिर्फ देश के किसानों के साथ खुला धोखा किया बल्कि अपनी कारपोरेट परस्ती के कारण आज देश को आर्थिक कंगाली…

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किसानों पर बुलेट और बुलडोजर चला रही है मोदी सरकार

‘ भाजपा भगाओ, किसान बचाओ रैली ’ और अखिल भारतीय किसान महासभा का राज्य सम्मेलन आरा (बिहार ). भोजपुर किसान आंदोलन के शिल्पकार और सामाजिक बदलाव के महानायक का. रामनरेश राम की आठवीं बरसी के मौके पर 26 अक्टूबर को आरा में ‘ भाजपा भगाओ, किसान बचाओ रैली ’ आयोजित की गई। जगदीश मास्टर-रामेश्वर यादव मैदान (वीर कुंवर सिंह स्टेडियम), रामनरेश राम नगर (आरा) में आयोजित इस रैली में आए हजारों किसानों की सभा को मुख्य रूप से भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य, अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव…

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तेलंगाना एक बार फिर से जमींदारों के शिकंजे में कस गया है

एन. आर.श्याम “भारतवर्ष में समय-समय पर उत्पादन के साधनों पर मालिकाना हक, उत्पादन संबंधों में बदलाव और उत्पादन करने वाली शक्तियों की उन्नति, अभिवृद्धि के लिए जहाँ एक ओर दलितों और किसानों का आंदोलन होता रहा, वहीं दूसरी तरफ उसे कुचलने का प्रयास भी होता रहा । कोरेगांव सभा को भी इसी रूप में और इस संबंध में हुई गिरफ्तारियों को भी लोगों का ध्यान भटकाने के रूप में देखा जाना चाहिए ।” ये शब्द हैं तेलगू के प्रमुख कहानी, उपन्यासकार अल्लम राजैय्या के । ये हैं तेलंगाना के कामारेड्डी…

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किसानों के साथ ये बर्बरता क्यूँ ?

आँसू गैस के गोले दागता आई.पी.एस. अफसर, किसान पर बंदूक ताने बिना वर्दी का पुलिस कर्मी और डंडा उठाए अकेले किसान पर डंडा ताने आधा दर्जन पुलिस वाले- ये इस प्रदर्शन की वो तस्वीरें हैं, जो मानों संकेत कर रही हों कि सरकार ने किसानों के खिलाफ एक तरह से युद्ध का ऐलान कर दिया है. मेहनतकशों के खिलाफ युद्ध का आगाज, हुकूमत ने किया है, अंजाम तक उसे मेहनतकशों का एकताबद्ध संघर्ष पहुंचाएगा.

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‘ किसानों का दमन कर मोदी सरकार ने सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है ’

  नई दिल्ली. अखिल भारतीय किसान महासभा ने दिल्ली के गाजीपुर बार्डर पर किसानों के शांतिपूर्ण मार्च को रोकने और आन्दोलनकारी किसानों का दमन करने की कड़ी निंदा की है. किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि एक तरफ मोदी सरकार किसानों के शांतिपूर्ण आन्दोलन का दमन कर रही है और दूसरी ओर देश भर में भीड़ हत्याओं को संगठित करने वाले फासिस्ट गिरोहीं को खुला संरक्षण दे रही है. उन्होंने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते आत्महत्या को मजबूर देश के पीड़ित किसानों…

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गांव की साझी सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन गति और उसके संकट को केन्द्र में रखती है हेमंत कुमार की कहानी ‘रज्जब अली’

(हाल ही में ‘पल-प्रतिपल’ में प्रकाशित हेमंत कुमार की कहानी ‘रज्जब अली’ को हमने समकालीन जनमत पोर्टल पर प्रकाशित किया , जिस पर पिछले दिनों पोर्टल पर काफी चर्चा हुई और बहसें भी आयीं। बहस को आगे बढ़ाते हुए प्रस्तुत है कहानी पर युवा आलोचक और ‘कथा’ के संपादक दुर्गा सिंह की टिप्पणी: सं) कहानी गांव की साझी सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन गति और उसके संकट को केन्द्र में रखती है।यह संकट विभाजनकारी साम्प्रदायिक राजनीति द्वारा पैदा किया गया है। यह संकट पहले भी मौजूद था, लेकिन वह गांवों के सामूहिक ताने-बाने…

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उसका भाषण था कि मक्कारी का जादू…

सौरभ यादव, शोध छात्र, दिल्ली विश्वविद्यालय 15 अगस्त, नई दिल्ली ।आज देश के 72 वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रचलित परम्परा के अनुसार प्रधानमंत्री ने डालमिया के गोद लिए लाल किले से देश को पहली बार संबोधित किया। यहां पहली बार शब्द का प्रयोग दो वजहों से किया जा रहा है । पहला तो ये कि मोदी जी को इस ‘पहली बार’ शब्द से विशेष प्रेम है, दूसरा इसलिए क्योंकि इससे पहले के प्रधानमन्त्रियों ने भारत सरकार के अधीन आने वाले लाल किले से देश को सम्बोधित किया था लेकिन हाल…

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माले जांच दल की रिपोर्ट में सामने आया मिर्जापुर में दबंगों द्वारा दलितों पर जुल्म का मामला

दबंगों ने दलित महिलाओं पर ट्रैक्टर चढ़ाया, हमले में एक महिला का गर्भपात हुआ  जांच दल के सदस्य घटनास्थल का दौरा करने के बाद अस्पताल में घायलों से मिले घटना के विरोध में 13 अगस्त को मिर्जापुर कलेक्ट्रेट पर माले का धरना और14 को राज्यव्यापी प्रतिवाद होगा लखनऊ, 12 अगस्त। भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने मिर्जापुर में लालगंज इलाके के कोलहा गांव में शुक्रवार को दलितों पर दबंगों द्वारा फायरिंग व जानलेवा हमले की जांच के लिए भेजे अपने तीन सदस्यीय दल की जांच रिपोर्ट आज यहां जारी कर दी। पार्टी ने उक्त रिपोर्ट…

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प्रेमचंद किसान जीवन की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार धरम, महाजन और साहूकार की भूमिका की शिनाख्त करते हैं

31 जुलाई 2018 को प्रेमचंद जयंती के अवसर पर शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय , बैकुंठपुर(छत्तीसगढ़) में ‘प्रेमचंद और हमारा समय’ विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई | इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ. पीयूष कुमार ने कहा कि किसानों की जिस स्थिति को प्रेमचंद ने आज से बहुत साल पहले अपने कथा साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया था, वह आज भी बदली नहीं है बल्कि और ज्यादा भयावह हुई है | उदारीकरण ने लूट का जो तंत्र खड़ा किया है उसने अनंत जीवटता वाले किसानों…

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सत्ता संपोषित मौजूदा फासीवादी उन्माद प्रेमचंद की विरासत के लिए सबसे बड़ा खतरा:डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन

लोकतंत्र, संविधान और साझी संस्कृति के नेस्तनाबूद करने की हो रही है गहरी साजिश-कल्याण भारती प्रेमचंद के सपनों के भारत से ही बचेगी हमारी साझी संस्कृति-डॉ. राम बाबू आर्य 31 जुलाई, दरभंगा । आज स्थानीय लोहिया चरण सिंह कॉलेज के सभागार में “मौजूदा फासीवाद उन्माद और प्रेमचंद की विरासत” विषय पर संगोष्ठी आयोजित कर जन संस्कृति मंच, दरभंगा द्वारा महान कथाकार प्रेमचंद की 138वीं जयंती मनाई गई । इस अवसर पर बोलते हुए जसम राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह ‘समकालीन चुनौती’ के संपादक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन ने कहा कि “हमारे…

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किसान के क्रमिक दरिद्रीकरण की शोक गाथा है ‘ गोदान ‘

प्रेमचंद ने गोदान में उपनिवेशवादी नीतियों से बरबाद होते भारतीय किसानी जीवन और इसके लिए जिम्मेदार ताकतों की जो पहचान आज के 75 साल पहले की थी वह आज भी हमें इसीलिए आकर्षित करती है कि हालत में फ़र्क नहीं आया है बल्कि किसान का दरिद्रीकरण तेज ही हुआ है और मिलों की जगह आज उसे लूटने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ आ गई हैं. यहाँ तक कि जातिगत भेदभाव भी घटने की बजाय बढ़ा ही है. उसे बरकरार रखने में असर रसूख वाले लोगों ने नए नए तरीके ईजाद कर लिए हैं.

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कृषि अर्थव्यवस्था पर हमला है गौ रक्षा कानून

देश के जिन राज्यों में भी गौ रक्षा कानून लागू किया गया है मेरे खुद के सर्वे के अनुसार उन राज्यों में गौ-वंश की संख्या दो तिहाई तक कम हो गयी है. इससे देश भर में घाटे की खेती की मार झेल रहे छोटे व मध्यम किसानों के सामने आर्थिक संकट ज्यादा गहरा गया है. हमारे देश में छोटी व माध्यम जोतों की संख्या अस्सी प्रतिशत के करीब है. इसमें भी बहुतायत छोटी जोतों की है. यही कारण है कि यहाँ छोटी खेती या ग्रामीण मजदूरी पर निर्भर हर परिवार…

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संसद के अविश्वास मत से सड़क का अविश्वास मत पड़ेगा मोदी सरकार को भारी

 पुरुषोत्तम शर्मा 20 जुलाई को संसद के अन्दर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को भारी मतों से गिराकर विश्वास मत हासिल करने में कामयाब हो गई है. संसद के अन्दर के इस गणित और नतीजे को सत्ताधारी, विपक्ष और देश तथा दुनियां के लोग पहले से जानते थे. इसी लिए सबकी दिलचस्पी सरकार के रहने न रहने में नहीं थी बल्कि इस बात में थी कि 2019 के मई में होने वाले अगले आम चुनावों का एजेंडा क्या होगा जिस पर सभी पार्टियां सदन में…

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मोदी सरकार की नई एमएसपी किसानों के साथ खुला धोखा

नई एमएसपी का गहराई से मूल्यांकन करें तो यह लगभग 15 प्रतिशत की औसत बढोतरी बैठती है. अगर आप मुद्रा स्फीति की बढ़ती दर से इसकी तुलना करें तो हर साल लगभग 4 प्रतिशत की दर से मुद्रास्फीति बढ़ती है. इसका मतलब यह हुआ कि मोदी जी के चार साल के कार्यकाल में ही मुद्रास्फीति की दर जो 16 प्रतिशत बढी उसे ही नई एमएसपी में चालाकी से समायोजित कर दिया गया है.

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विभाजकारी राजनीति के खिलाफ एकताबद्ध आंदोलन की राह पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का किसान

भारतीय किसान यूनियन के बिखराव के बाद अपने-अपने स्तर पर सक्रिय किसान यूनियन के इन ग्रुपों के बीच किसानों की संगठित ताकत को फिर बटोरने पर सहमति बनी है. सभी कार्यकर्ता किसानों के मुद्दे पर संयुक्त रूप से लड़ने और किसानों की एकता को तोड़ने की विभाजनकारी राजनीति को परास्त करने का संकल्प लेते दिखे. यह आज के भारत के किसान आंदोलन के लिए एक अच्छी सीख हो सकती है.

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अवध का किसान विद्रोह : किसानों और मेहनतकशों की स्थिति को समझने के लिए एक जरूरी किताब

डॉ चन्द्र भूषण अंकुर भारत एक कृषि प्रधान देश है, यह बात विद्यार्थियों को 20वीं शताब्दी तक प्राथमिक कक्षाओं में रटा दी जाती थी किन्तु किसानों के इस देश में, कभी भी किसान नेतृत्कारी भूमिका में नहीं रहा। आजादी की लड़ाई के दौरान, किसानों ने कई बार ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी, अपने हितों का बलिदान कर आजादी के संघर्ष को तेज किया, बावजूद इसके प्रायः कांग्रेस पार्टी, जो भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन की नेतृत्वकारी पार्टी थी, ने भी उनके संघर्षों को उतना ही महत्व दिया, जितना पार्टी के लिए जरूरी…

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भोजपुर : कर्ज़ बोझ के दबाव में बटाईदार किसान दशरथ बिंद ने की आत्महत्या – भाकपा-माले

बटाईदार किसानों को फसल क्षति का मुआवजा दे सरकार-भाकपा माले मनोज मंजिल पटना, 8 अप्रैल.भोजपुर के बड़हरा प्रखंड के सिन्हा ओपी के घाघर मिल्की गांव में बटाईदार किसान दशरथ बिंद ने 8 अप्रैल को आत्महत्या कर ली. वह कर्ज के बोझ से दबे हुए थे और ओलावृष्टि के कारण उन्हें  खेती में काफी नुकसान हुआ था. भाकपा-माले की जांच टीम ने 8 अप्रैल को घटनास्थल का दौरा किया. जांच टीम में भाकपा-माले की केंद्रीय कमिटी के सदस्य मनोज मंजिल, राजू यादव, तरारी से भाकपा-माले विधायक सुदामा प्रसाद, बड़हरा के प्रखंड…

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गोरखपुर के मानबेला में किसानों पर पुलिस का लाठीचार्ज, महिला का हाथ टूटा

चार महिलाओं सहित सात को पुलिस ने हिरासत में लिया, किसानों ने भी किया पथराव किसानों और कांग्रेस ने पुलिस पर कई राउंड फायरिंग करने का आरोप लगाया गोरखपुर. गोरखपुर के मानबेला में  नौ वर्ष पहले अधिग्रहीत भूमि पर कब्जा करने को लेकर ग्रामीणों व गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के बीच चल रही तनातनी शनिवार की शाम हिंसक हो गई। ग्रामीणों का पुलिस से टकराव हुआ। पहले दोनों तरफ से पथराव हुआ और उसके बाद पुलिस ने लाठचार्ज किया जिसमें एक महिला का हाथ टूट गया जबकि एक और व्यक्ति…

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