किसानों के साथ ये बर्बरता क्यूँ ?

आँसू गैस के गोले दागता आई.पी.एस. अफसर, किसान पर बंदूक ताने बिना वर्दी का पुलिस कर्मी और डंडा उठाए अकेले किसान पर डंडा ताने आधा दर्जन पुलिस वाले- ये इस प्रदर्शन की वो तस्वीरें हैं, जो मानों संकेत कर रही हों कि सरकार ने किसानों के खिलाफ एक तरह से युद्ध का ऐलान कर दिया है. मेहनतकशों के खिलाफ युद्ध का आगाज, हुकूमत ने किया है, अंजाम तक उसे मेहनतकशों का एकताबद्ध संघर्ष पहुंचाएगा.

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‘ किसानों का दमन कर मोदी सरकार ने सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है ’

  नई दिल्ली. अखिल भारतीय किसान महासभा ने दिल्ली के गाजीपुर बार्डर पर किसानों के शांतिपूर्ण मार्च को रोकने और आन्दोलनकारी किसानों का दमन करने की कड़ी निंदा की है. किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि एक तरफ मोदी सरकार किसानों के शांतिपूर्ण आन्दोलन का दमन कर रही है और दूसरी ओर देश भर में भीड़ हत्याओं को संगठित करने वाले फासिस्ट गिरोहीं को खुला संरक्षण दे रही है. उन्होंने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते आत्महत्या को मजबूर देश के पीड़ित किसानों…

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किसान के क्रमिक दरिद्रीकरण की शोक गाथा है ‘ गोदान ‘

प्रेमचंद ने गोदान में उपनिवेशवादी नीतियों से बरबाद होते भारतीय किसानी जीवन और इसके लिए जिम्मेदार ताकतों की जो पहचान आज के 75 साल पहले की थी वह आज भी हमें इसीलिए आकर्षित करती है कि हालत में फ़र्क नहीं आया है बल्कि किसान का दरिद्रीकरण तेज ही हुआ है और मिलों की जगह आज उसे लूटने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ आ गई हैं. यहाँ तक कि जातिगत भेदभाव भी घटने की बजाय बढ़ा ही है. उसे बरकरार रखने में असर रसूख वाले लोगों ने नए नए तरीके ईजाद कर लिए हैं.

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विभाजकारी राजनीति के खिलाफ एकताबद्ध आंदोलन की राह पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का किसान

भारतीय किसान यूनियन के बिखराव के बाद अपने-अपने स्तर पर सक्रिय किसान यूनियन के इन ग्रुपों के बीच किसानों की संगठित ताकत को फिर बटोरने पर सहमति बनी है. सभी कार्यकर्ता किसानों के मुद्दे पर संयुक्त रूप से लड़ने और किसानों की एकता को तोड़ने की विभाजनकारी राजनीति को परास्त करने का संकल्प लेते दिखे. यह आज के भारत के किसान आंदोलन के लिए एक अच्छी सीख हो सकती है.

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