मोदी सरकार द्वारा किसानों के साथ धोखाधड़ी के खिलाफ किसानों का “ दिल्ली मार्च ” 29-30 नवम्बर को

अखिल भारतीय किसान महासभा नई दिल्ली. 2014 के लोकसभा चुनाव में वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा ने देश के किसानों से कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुरूप फसलों का डेढ़ गुना दाम देने का वायदा किया था. यही नहीं उन्होंने देश के लोगों को अच्छे दिन लाने का वायदा भी किया था. पर अपने साढे चार साल के शासन में इस सरकार ने न सिर्फ देश के किसानों के साथ खुला धोखा किया बल्कि अपनी कारपोरेट परस्ती के कारण आज देश को आर्थिक कंगाली…

Read More

प्रेमचंद किसान जीवन की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार धरम, महाजन और साहूकार की भूमिका की शिनाख्त करते हैं

31 जुलाई 2018 को प्रेमचंद जयंती के अवसर पर शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय , बैकुंठपुर(छत्तीसगढ़) में ‘प्रेमचंद और हमारा समय’ विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई | इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ. पीयूष कुमार ने कहा कि किसानों की जिस स्थिति को प्रेमचंद ने आज से बहुत साल पहले अपने कथा साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया था, वह आज भी बदली नहीं है बल्कि और ज्यादा भयावह हुई है | उदारीकरण ने लूट का जो तंत्र खड़ा किया है उसने अनंत जीवटता वाले किसानों…

Read More

किसान के क्रमिक दरिद्रीकरण की शोक गाथा है ‘ गोदान ‘

प्रेमचंद ने गोदान में उपनिवेशवादी नीतियों से बरबाद होते भारतीय किसानी जीवन और इसके लिए जिम्मेदार ताकतों की जो पहचान आज के 75 साल पहले की थी वह आज भी हमें इसीलिए आकर्षित करती है कि हालत में फ़र्क नहीं आया है बल्कि किसान का दरिद्रीकरण तेज ही हुआ है और मिलों की जगह आज उसे लूटने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ आ गई हैं. यहाँ तक कि जातिगत भेदभाव भी घटने की बजाय बढ़ा ही है. उसे बरकरार रखने में असर रसूख वाले लोगों ने नए नए तरीके ईजाद कर लिए हैं.

Read More