सुशील सिद्धार्थ के अन्दर सृजन की बहती नदी थी जिसे बाहर आना बाकी था

कौशल किशोर   सुशील सिद्धार्थ का जाना दुखद, बेहद दुखद। अविश्वसनीय सा, सदमे से भरा। हम सभी स्तब्ध हैं इसलिए कि यह कोई जाने की उम्र नहीं थी। वे साहित्य के मार्चे पर बड़ी मजबूती से डटे थे। उनका जन्म 2 जुलाई 1958 को सीतापुर, उत्तर प्रदेश के एक  गांव में हुआ। साहित्य यात्रा का आरम्भ उन्होंने छात्र जीवन से किया। लखनऊ विश्वविद्यालय से अपने मित्रों के साथ मिलकर एक पत्रिका की शुरुआत की। यह अस्सी का दशक रहा होगा। कई विधाओं में उन्होंने सृजन किया। कविताएं, आलोचना, व्यंग्य, संपादन…

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